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PM-Aasha: सही से लागू किया गया तो सालाना 3.84 लाख करोड़ होंगे खर्च

प्रकाशित Tue, 18, 2019 पर 12:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मोदी सरकार की फ्लैगशिप स्कीम PM-Aasha को अगर पूरी क्षमता के साथ लागू किया जाए तो इस स्कीम पर सरकार को सालाना 3.84 लाख करोड़ का खर्च आएगा। ये आंकड़े एक स्टडी में सामने आए हैं।


फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ की एक स्टडी में सामने आया है कि अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाता है तो इस योजना पर सरकार को हर साल 3.84 लाख करोड़ का खर्च आएगा।


जब सितंबर, 2018 में सरकार ने ये योजना पेश की थी, तो इसमें किसानों को उनके उत्पादन की लागत का 50 फीसदी सरकारी एजेंसियों की ओर से खरीदारी और निजी खरीद में हुए भावांतर के समर्थन से देने का वायदा किया गया था।


हालांकि, 2018 की खरीफ की फसल के दौरान National Agriculture Cooperative Marketing Federation of India (NAFED) की ओर से दालों और ऑयलसीड्स की कुल खरीद महज 6 फीसदी रही, जो पिछली खरीफ से भी 2.5 फीसदी कम थी।


2018 के वित्त वर्ष में सरकार ने NAFED को दालों और ऑयलसीड्स की खरीद के लिए दी गई गारंटी को बढ़ाकर 29,000 करोड़ कर दिया था। इस योजना के तहत 16,550 करोड़ की अतिरिक्त गारंटी देने का वादा भी किया गया।


IEG की इस स्टडी में ये निष्कर्ष निकला है कि अगर FCI, NAFED और दूसरी सरकारी एजेंसियां चावल, गेहूं, दाल, ऑयलसीड्स, कपास और मोटे अनाज के सरप्लस पैदावार का 30 फीसदी हिस्सा खरीदने में 2.87 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी।


इसमें आगे बताया गया है कि अगर मान लें कि मंडी का भाव MSP से 20 फीसदी नीचे है और सरप्लस पैदावार के बचे हुए 70 फीसदी हिस्से की निजी खरीदारी होती है तो सरकार को 96,597 करोड़ रुपए का खर्चा उठाना होगा। वहीं अगर मंडी भाव MSP से 10 फीसदी कम होता है तो सरकार को 48,298 करोड़ का खर्च उठाना होगा।