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Kumbh 2021: सोमवती अमावस्या पर संतों का शाही स्नान, 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

सुरक्षा की दृष्टि से 20 हजार से भी अधिक पुलिस बलों के जवान और बम निरोधक दस्ते मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं
अपडेटेड Apr 13, 2021 पर 09:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच सोमवती अमावस्या के अवसर पर महाकुंभ (Kumbh 2021) के दूसरे शाही स्नान के दिन सोमवार को साधु संतों ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ मुख्य स्नान घाट हर की पैड़ी पर असीम आस्था और अपार उत्साह के साथ मोक्षदायिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। अमृत कलश से छलकी बूंदों का पुण्य कमाने के लिए देश के कोने कोने से उमडे़ श्रद्धालुओं ने भी यहां शहर के अन्य घाटों पर गंगा में डुबकी लगाई और कुंभ स्नान का लाभ लिया।


महाकुंभ मेला प्रशासन ने दावा किया कि हरिद्वार से लेकर देवप्रयाग तक पूरे मेला क्षेत्र में 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर लिया है। कुंभ मेला पुलिस नियंत्रण कक्ष ने एक बयान में कहा कि आज शाम 6 बजे तक कुंभ मेला क्षेत्र में और उसके आसपास कुल 31 लाख भक्तों ने स्नान किया है।


सबसे पहले श्री पंचायती निरंजनी अखाडे़ के साधु संत और नागा संन्यासी अपने पीठाधीश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज की अगुवाई में स्नान के लिए हर की पैड़ी ब्रहमकुंड पहुंचे। कैलाशानंद गिरी महाराज ने सबसे पहले गंगा पूजन किया और अखाडे़ के इष्ट देव कार्तिकेय भगवान की डोली को गंगा स्नान कराया। इसके बाद अखाडे़ के अन्य साधु संतों ने गंगा में डुबकी लगाई।


नेपाल के पूर्व राजा ने भी किया शाही स्नान


महाकुंभ में भाग लेने के लिए पहली बार हरिद्वार पहुंचे पूर्व नेपाल नरेश राजा ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह ने भी निरंजनी अखाड़े के साथ ब्रह्म कुंड में शाही स्नान किया। इसके बाद शाही स्नान के क्रम में जूना अखाड़ा के हजारों साधु-संत और नागा संन्यासी अपने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज, अखाड़े के अध्यक्ष महंत हरि गिरी सहित अन्य महंतों के नेतृत्व में गंगा स्नान के लिए पहुंचे।


जूना अखाडे़ ने सबसे पहले अपने इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय की पालकी को स्नान कराया। इष्टदेव के स्नान करते हुए हजारों नागा हर-हर महादेव का जय गोष करते हुए गंगा में कूद पड़े।मोक्ष की कामना में गंगा की अविरल धारा में स्नान करते नागाओं का उत्साह देखते ही बनता था। जूना अखाड़े के साथ अग्नि, आवाहन के नागा साधुओं और संतो ने भी स्नान किया।


महामंडलेश्वर लक्ष्मीमणि त्रिपाठी अचानक हुईं बेहोश


इसके अलावा, हरिद्वार महाकुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े ने भी शाही स्नान किया। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी मणि त्रिपाठी की अगुवाई में सैकड़ों किन्नर संत ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए हरकी पैड़ी पहुंचे और शाही स्नान किया। हालांकि, इसी बीच महामंडलेश्वर लक्ष्मीमणि त्रिपाठी अचानक बेहोश हो गईं, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस से एक निजी अस्पताल ले जाया गया।


इसके बाद महा निर्वाणी अखाड़े एवं अटल अखाड़े के साधु संत बैंड बाजे के साथ निर्वाणी अखाडे़ के आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद महाराज की अगुवाई में हरकी पैड़ी पहुंचे। भगवान सूर्य की पालकी को स्नान कराने के बाद अखाड़ों के संतों ने गंगा स्नान किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र साधु संतों के रंग में डूबा नजर आया। शाही स्नान के लिए जाते साधु संतों पर उत्तराखंड सरकार की ओर से हैलीकॉप्टर से लगातार पुष्पवर्षा की जाती रही, जिससे वातावरण दिव्य बन गया।


सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम


इससे पहले, सुबह सात बजे मेला प्रशासन ने मुख्य स्नान घाट हर की पैडी ब्रहमकुंड को पूरा खाली करा लिया, जिससे पूरे दिन यहां सभी 13 अखाडों से जुडे साधु संत शाही स्नान कर सकें। सुरक्षा की दृष्टि से 20 हजार से भी अधिक पुलिस बलों के जवान और बम निरोधक दस्ते मेला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।


कोरोना के बढते प्रकोप के बीच हो रहे महाकुंभ शाही स्नान के दौरान आने जाने वाले लोगों को पुलिस के जवान मास्क बांटते और सावधानी बरतने की सलाह देते नजर आए। हर की पैड़ी तथा अन्य घाटों पर महाकुंभ मेला प्रशासन ने सैनिटाइजर की मशीनें लगाई हैं।


कोविड 19 के कारण एक महीने की अवधि के लिए सीमित कर दिए गए महाकुंभ का यह दूसरा शाही स्नान है। इससे पहले एक मार्च को महाशिवरात्रि के मौके पर महाकुंभ का पहला शाही स्नान पड़ा था।


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