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2050 तक समंदर में डूब सकते हैं मुंबई-कोलकाता के बड़े हिस्से

अगर कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो मुंबई, नवी मुंबई और कालकाता जैसे शहर जलमग्न हो सकते हैं।
अपडेटेड Oct 30, 2019 पर 16:41  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अमेरिका की एक एजेंसी ने ऐसा दावा किया है कि जिसे सुनते ही आपके कान खड़े हो जाएंगे। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और कोलकाता जैसे शहर बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। जिससे इन शहरों के लोग तबाह हो सकते हैं।


दरअसल अमेरिका की एजेंसी ने दावा किया है कि अगर कार्बन डाई आक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो भारत में 2050 तक कोलकाता, मुंबई, नवी मुंबई जैसे शहर जलमग्न हो सकते हैं। यूएस की क्लाइमेट सेंट्रल ने ये रिपोर्ट जारी की है।
Journal, Nature Communications में प्रकाशित क्लाइमेट सेंट्रल स्टडी के अनुसार, नासा के शटल रेडार टोपोग्राफी मिशन (SRTM) ने जो आकलन किया है उसमें सुधार करते हुए कहा गया है कि 50 लाख के बजाय 3.5 करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।   


नासा ने अपने मॉडल में आकाश की सबसे नजदीकी सतहों को मापने के दौरान, पेड़ की चोटी और छतों की ऊंचाई को शामिल किया है, जहां जमीन को ब्लॉक किया है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक ग्लोबल स्तर पर 30 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही हाई टाइड के समय 15 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं। सबसे अधिक इसका एशिया में पड़ेगा।


क्लाइमेट सेंट्रल ने कहा है कि कार्बन उत्सर्जन को पेरिस समझौते के तहत कम नहीं किया गया तो साल 2100 तक हाईटाइड की लाइन बढ़ जाएगी। जिससे पूरी दुनिया में 340 मिलियन लोग प्रभावित हो सकते हैं। 8 एशियाई देशों में हमेशा बाढ़ की स्थित बनी रहती है। जिससे 10 मिलियन लोग प्रभावित होते हैं। 


इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बीसवीं सदी में ग्लोबल औसत समुद्री स्तर 11-16 सेमी बढ़ गया है। अगर कार्बन उत्सर्जन में हम कटौती  कतरे भी हैं तो इस सदी में और 0.5 मीटर बढ़ सकता है।


नए आंकड़ों क अनुसार साल 2050 तक तटीय बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्रमश: 93 और 42 मिलियन लोगों के साथ बांग्लादेश और चीन सबसे अधिक प्रभावित होंगे।


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