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अयोध्या केस से मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को हटाया गया, दी गई यह वजह

धवन ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखते हुए बताया कि वह अब पुनर्विचार याचिका या इस मामले से किसी तरह से नहीं जुड़े हैं
अपडेटेड Dec 04, 2019 पर 08:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले सीनियर लॉयर राजीव धवन को इस केस से हटा दिया है। धवन ने मंगलवार को खुद फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर बताया कि मुस्लिम पक्ष ने उन्हें इस केस से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मूर्खतापूर्ण आधार पर इस मामले से हटा दिया गया है कि वह अस्वस्थ हैं।


धवन ने फेसबुक पर इस संबंध में एक पोस्ट लिखते हुए बताया कि वह अब पुनर्विचार याचिका या इस मामले से किसी तरह से नहीं जुड़े हैं।


उन्होंने लिखा- AOR (एडवोकेट ऑन रिकार्ड) एजाज मकबूल, जो जमीयत का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने मुझे बाबरी केस से हटा दिया गया है। किसी आपत्ति के बगैर ही बर्खास्तगी मंजूर करने का फॉर्मल लेटर भेजा गया है। मैं अब पुनर्विचार या इस मामले से अब जुड़ा नहीं हूं।


धवन ने आगे लिखा- मुझे सूचित किया गया है कि मदनी ने संकेत दिया है कि मुझे इस मामले से हटा दिया गया है क्योंकि मैं अस्वस्थ हूं। यह पूरी तरह बकवास है। उन्हें मुझे हटाने के लिए अपने एओआर एजाज मकबूल को निर्देश देने का अधिकार है जो उन्होंने उनके निर्देशों पर किया है। लेकिन इसके लिए बताई जा रही वजह सही नहीं है।


मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता वाले जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की है।


राजीव धवन ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा- मैंने एकजुटता के साथ सभी मुस्लिम पक्षकारों की ओर से इस मामले में बहस की थी और ऐसा ही चाहूंगा। मुस्लिम पक्षकारों को पहले अपने मतभेद सुलझाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अस्वस्थ होने की वजह से उन्हें हटाए जाने के बारे में मकबूल की ओर से सार्वजनिक तौर पर कहे जाने के बाद ही उन्होंने फेसबुक पर अपनी राय रखी है।


उन्होंने कहा- अगर मैं अस्वस्थ हूं तो फिर मैं दूसरे मामलों में यहां कोर्ट में कैसे पेश हो रहा हूं? मुस्लिम पक्षकारों के मसले के प्रति मेरी प्रतिबद्धता है लेकिन इस तरह का बयान पूरी तरह गलत है।


बता दें कि पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने 9 नवंबर को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केंद्र को निर्देश दिया था कि अयोध्या में प्रमुख स्थल पर मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की जमीन दी जाए। लेकिन मुस्लिम पक्ष इस जमीन को स्वीकार करे या फिर पुनर्विचार याचिका दाखिल करे, इसपर विचार कर रहा है।


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