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टेस्ला सहित 324 कंपनियों को इंसेंटिव देकर भारत बुला रही है मोदी सरकार

ट्रेड वॉर से फायदा लेने के लिए सरकार इन कंपनियों को भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है
अपडेटेड Nov 21, 2019 पर 08:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर का फायदा उठाने के लिए भारत ने टेस्ला (Tesla) सहित 324 कंपनियों को भारत में फैक्ट्री लगाने पर इन्सेंटिव्स देने की योजना बनाई है। डिपॉर्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री (DPI) और इंटर्नल ट्रेड एंड इनवेस्टमेंट इंडिया के दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार भारत में प्लांट लगाने वाली कंपनियों को जमीन के साथ बिजली, पानी और सड़क मुहैया कराएगी। सरकार जिन कंपनियों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है उनमें टेस्ला के अलावा एली लिली एंड कंपनी (Eli Lilly & Co), दक्षिण कोरिया की हनवा केमिकल कॉर्प (Hanwha Chemical Corp) और ताइवान की होन हई प्रीसिजन इंडस्ट्री कंपनी (Hon Hai Precision Industry Co) शामिल है।


अमेरिका-चीन के ट्रेड वॉर से वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों को फायदा हो रहा है। जमीन अधिग्रहण के कड़े कानून और लेबर ना मिलने की वजह से ये कंपनियां भारत आने से बचती है।


सरकार के लेटेस्ट प्रपोजल के जरिए लालफीताशाही घटाना चाहती है। जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 5 फीसदी रही। यह पिछले 6 साल का सबसे निचला स्तर है। सरकार की योजना 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने की है। ऐसे में सरकार अगर इन कंपनियों को भारत आने के लिए मना लेती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा।


क्या है प्लान?


इस प्लान के तहत सरकार रेडी-टू-मूव इंडस्ट्रियल कलस्टर के लिए लैंड बैंक बनाएगी। इसके साथ ही सरकार लोकेशन-बेस्ड इन्सेंटिव भी मुहैया कराएगी। मौजूदा योजना के मुताबिक, सरकार हाइब्रिड व्हीकल्स, फ्यूल एफिशिएंसी और कार्बन टैक्सेशन के लिए सरकार इंसेंटिव्स देगी। 2017 से अब तक भारत वर्ल्ड बैंक के ईज ऑफ बिजनेस डूइंग में 37 पायदान ऊपर आ चुका है। लेकिन अभी भी यह 63वें पायदान पर है। यह अभी ना सिर्फ चीन से पीछे है बल्कि रवांडा और कोसोवो से पीछे है।


फिलहाल किसी कंपनी को फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण खुद करना पड़ता है। हालांकि अब सरकार इन कंपनियों को इसमें मदद कर सकती है।



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