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NASA को मिला Chandryan-2 के विक्रम लैंडर का मलबा, इस भारतीय इंजीनियर ने की मदद

नासा ने इसके लिए चेन्नई के एक इंजीनियर को क्रेडिट भी दिया है, जिनकी रिसर्च से एजेंसी को मदद मिली है
अपडेटेड Dec 03, 2019 पर 15:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA (National Aeronautics and Space Administration) ने भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO (Indian Space Research Organization) के चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट के लैंडर विक्रम को आखिर काफी मशक्कत के बाद ढूंढ लिया है। नासा को विक्रम लैंडर के मलबे का पता चल गया है। नासा के लूनर रिकनॉसॉन्स ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter-LRO) ने चांद के साउथ पोल क्षेत्र में क्रैश साइट और लैंडर के मलबे की स्थिति का पता लगाया है। मंगलवार को एजेंसी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।


नासा ने इसके लिए चेन्नई के एक इंजीनियर को क्रेडिट भी दिया है, जिनकी रिसर्च से एजेंसी को मदद मिली है।


LRO को विक्रम लैंडर का मलबा क्रैश साइट से 750 किलोमीटर दूर मिला है। एजेंसी ने बताया है कि LRO को लैंडर के तीन टुकड़े मिले हैं। नासा ने इम्पैक्ट साइट की तस्वीर भी जारी की है। इसमें नीले और हरे डॉट्स के जरिए मलबे और प्रभावित हुए सतह की पहचान की गई है। हरे डॉट लैंडर के टुकड़े हैं, वहीं नीले डॉट चांद की सतह की मिट्टी है, जो क्रैश की वजह से उखड़ गई है।


नासा ने बताया कि 26 सितंबर को क्रैश साइट की कई तस्वीरें जारी की थीं और रिसर्च के लिए कई एक्सपर्ट्स को इन्वाइट किया गया था। इसके बाद चेन्नई के शानमुगा सुब्मण्यम नाम के एक इंजीनियर ने उनसे कॉन्टैक्ट किया और बताया कि उन्हें लैंडर के मलबे का पहला टुकड़ा क्रैश साइट के 750 किमी दूर की जगह पर मिल गया है।


नासा ने शानमुगा के रिजल्ट को जांचा, कन्फर्म किया, उसके बाद उसने आखिरकार लैंडर ढूंढने की जानकारी दी है। शानमुगा मैकेनिकल इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं और चेन्नई की इंजीनियरिंग कंपनी Lennox India Technology Centre में टेक्निकल आर्किटेक्ट के तौर पर कम करते हैं।


इसरो ने नासा के इस दावे के बाद उससे बाकी जुड़ी डिटेल मांगी है, नासा जल्द ही इसपर रिपोर्ट देगा।


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