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FY 2019-20 में $35 अरब का FDI आया: चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार का फोकस सरकारी कंपनियों का कर्ज चुकाने पर है
अपडेटेड Dec 14, 2019 पर 12:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

निर्मला सीतारमण ने आज दो मुद्दों पर बात करेंगी। इसमें एक संसदीय उपाय और दूसरा पहले उठाए गए कदमों से अब तक क्या फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह हम बजट की तैयारी कर सकते हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था की कमजोरी को देखते हुए जहां जरूरत है सरकार वहां काम कर रही है।


सीतारमण ने कहा कि फाइनेंस मिनिस्ट्री ने अभी GST के रेट में बदलाव को लेकर कोई चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा कि आयात से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए हमने मंत्रियों के एक समूह से बातचीत की है। सरकार की कोशिश है कि नई पैदावार के साथ जरूरी कमोडिटी आयात करके हालात को ठीक किया जा सके।


क्या कहा चीफ एडवाइजर ने?


चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार का फोकस सरकारी कंपनियों का कर्ज चुकाने पर है। सरकार चाहती है कि सभी NBFC और HFC को क्रेडिट मुहैया करा और बिल में डिस्काउंट देकर MSME को राहत देने की योजना है।


RBI की गाइडलाइंस के बाद सभी सरकारी बैंकों ने लोन को रेपो रेट से जोड़ दिया है। नवंबर तक 8 लाख लोगों को करीब 70,000 करोड़ से ज्यादा लोन दिया गया है।


सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकार सभी सरकारी कंपनियों का 61,000 करोड़ रुपए का बकाया क्लियर करना चाहती है। सुब्रमण्यम ने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 15 फीसदी करने से भारतीय कंपनियां भी वैश्विक कंपनियों के बराबर हो गई हैं।


सुब्रमण्यम ने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 15 फीसदी करने से भारतीय कंपनियां भी वैश्विक कंपनियों के बराबर हो गई हैं। उन्होंने कहा, "लिबरलाइजेशन की वजह से इस फिस्कल ईयर की पहली छमाही में 35 अरब डॉलर का रिकॉर्ड FDI आया है।"


सुब्रमण्यम ने कहा कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के नियम सख्त कर दिए गए हैं। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 5 नवंबर को FPI के लिए KYC नॉर्म्स में कई बदलाव किए हैं।


RBI ने GIFT-IIFSC में डॉलर-रुपए में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की इजाजत दे दी है।


वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) में भारत 63वें पायदान पर पहुंच गया है।  


सुब्रमण्यम कहा कि लेबर लॉ को 4 हिस्सों में बांट दिया गया है। कोड ऑफ वेजेज 2019 को अगस्त 2019 में नोटिफाई कर दिया गया है। कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस बिल, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड और सोशल सिक्योरिटी कोड बिल को इस साल नोटिफाई किया गया है।


चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि इकोनॉमिक को मजबूत करने वाले कई कदम उठाए गए हैं। 2017-18 में कैजुअल वर्कर और फॉर्मल वर्कर्स की तादाद 5-5 फीसदी बढ़ी है।


इस फिस्कल ईयर में अभी तक इनकम टैक्स रिफंड 1.57 लाख करोड़ रुपए का हुआ है। पिछले साल यह आंकड़ा 1.23 लाख करोड़ रुपए का था। इस फिस्कल ईयर में IGST 38,988 करोड़ रुपए का रहा है जो पिछले फिस्कल ईयर में 56,057 करोड़ रुपए था।


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