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ग्लोबल रेट और बाजार भाव से ज्यादा है फसलों की MSP, कोई हल निकालना जरूरी: गडकरी

गडकरी कहा, कृषि क्षेत्र में MSP के मुद्दे का हल निकाले बिना, हम अपनी अर्थव्यवस्था को गति नहीं दे सकते
अपडेटेड Jun 12, 2020 पर 13:31  |  स्रोत : Moneycontrol.com

किसानों को उनकी पैदावार के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP घरेलू बाजार भाव से ज्यादा है। यह कहना है रोड एवं ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी का। उन्होंने कहा कि भारत में MSP ग्लोबल रेट से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि किसी तरह की आर्थिक समस्या शुरू होने से पहले इसका कोई दूसरा उपाय खोजना जरूरी है। गडकरी ने एक वेबिनार के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की एक बड़ी समस्या है कि पैदावार की MSP और उसके अंतरराष्ट्रीय एवं बाजार भाव में बहुत बड़ा अंतर है।


गडकरी कहा, ‘‘हमें इसके लिए कुछ विकल्प तलाशने होंगे और कृषि क्षेत्र में इस मुद्दे का हल निकाले बिना, हम अपनी अर्थव्यवस्था को गति नहीं दे सकते।’’ उन्होंने कहा कि देश के पास अतिरिक्त मात्रा में चावल और गेहूं का भंडार है, लेकिन इनके भंडारण की समस्या है। गडकरी ने कहा कि उन्होंने चावल को इथेनॉल या बायो-इथेनॉल में बदलने की नीति बनाने का सुझाव दिया है।


उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री के प्रमुख सलाहकार पी के सिन्हा और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि, तेल, गैर-पारंपरिक ऊर्जा और एमएसएमई के सचिवों सहित शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में यह सुझाव दिया।


उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में हमारा इथेनॉल उत्पादन 20,000 करोड़ रुपs का है और आयात 6-7 लाख करोड़ रुपये का होता है। इसलिए अब हम एक लाख करोड़ रुपये की इथेनॉल अर्थव्यवस्था बनाने की योजना बना रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के 200 बंद कारखाने हैं जिन्हें जैव इथेनॉल उत्पादन के लिए रूपांतरित किया जा सकता है।


उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में, फसल के पैटर्न को बदलने और गेहूं और धान खेती के रकबे को कम करने की आवश्यकता है।


गडकरी ने कहा, ‘‘पंजाब और हरियाणा में, हमारे पास भंडारण के लिए भी जगह नहीं है ... तो यह देश के लिए एक बुरी स्थिति है। एक तरफ, हमारे पास अन्न का अतिरिक्त भंडार है और दूसरी तरफ, हमारे पास भंडारण के लिए जगह नहीं है।” इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत 90,000 करोड़ रुपये के भारी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करता है क्योंकि भारत का तिलहन उत्पादन अपेक्षानुकूल नहीं है।


उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्राजील में प्रति एकड़ सोयाबीन का उत्पादन क्रमशः 30 क्विंटल और 27-28 क्विंटल है, लेकिन भारत में यह सिर्फ 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ है। उन्होंने कहा कि उच्च उत्पादकता के लिए देश में गुणवत्ता वाले तिलहन पर शोध की आवश्यकता है।



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