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तबलीगी जमात और मरकज़ क्या है और निजामुद्दीन से इस जमात का क्या कनेक्शन है?

लॉकडाउन के बावजूद निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के 400 लोग मरकज़ के लिए जुटे थे
अपडेटेड Apr 01, 2020 पर 08:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोनावायरस (Coronavirus) की वजह से पूरा देश घरों में बैठने को मजबूर है लेकिन दिल्ली के निजामुद्दीन में 300 से 400 लोग मरकज़ (Markaz) धार्मिक समारोह के लिए जमा हुए थे। इनमें से कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यहां मरकज़ के लिए जो लोग आए थे वो तबलीगी जमाज (Tablighi Jamaat) के थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तबलीगी जमात क्या है?


मरकज़ क्या है?


सबसे पहले जानते हैं कि मरकज़ क्या होता है। मरकज़ (Markaz) का मतलब होता है मीटिंग। यानी देश भर के 200 से 300 लोग निजामुद्दीन में मरकज़ यानी किसी सभा या बैठक के लिए आए थे।


तबलीगी जमात क्या है?


अब जानते हैं कि तबलीगी जमात क्या है? तबलीगी का मतलब है अल्लाह की बातों का प्रचार-प्रसार करना। जमात का मतलब होता है समूह। यानी ईश्वर की कही बातों का प्रचार प्रसार करने वाले समूह को तबलीगी जमात कहते हैं। ये लोग इस्लाम को मानते हैं। माना जाता है कि दुनिया भर में इस जमात के करीब 15 करोड़ सदस्य हैं।


कब शुरू हुआ था मरकज़ तबलीगी जमात?


भारत में तबलीगी जमात (Tablighi jamaat) की शुरुआत 1927 में मुहम्मद इलियास अल- कांधलवी ने की थी। भारत में यह हरियाणा के नूंह जिले से शुरू हुआ था। इस जमात के 6 उसूल हैं जिनपर ये चलते हैं। ये हैं कलिमा, सलात, इल्म, इकराम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत और दावत-ओ-तबलीग। दिल्ली के निजामुद्दीन में इस जमात का हेडक्वार्टर है।


इस जमात की शुरुआत भले ही 1927 में हुई थी लेकिन इसे अपने पहले मरकज़ या बैठक में करीब 14 साल का वक्त लगा। 1941 में 25,000 लोगों के साथ इस जमात के पहले मरकज़ की शुरुआत हुई। दुनियाभर के देश में हर साल इसका आयोजन होता है। तबलीगी जमात का सबसे बड़ा जलसा बांग्लादेश में आयोजित होता है। वैसे भारत और पाकिस्तान में भी इसका सालाना जलसा होता है।


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