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कंपनियों को 'पापा बचाओ' के माइंडसेट से बाहर निकलना होगा: चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णामूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा है कि सरकारी मदद ऐसे समय में की जा सकती है जब कोई सेक्टर बढ़ रहा हो
अपडेटेड Aug 23, 2019 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इकोनॉमिक स्लोडाउन के दौरान कंपनियां सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद करती है। लेकिन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कृष्णामूर्ति सुब्रमण्यम ने निजी सेक्टर की कंपनियों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपना माइंडसेट बदलने की जरूरत है। वे मुनाफा अपने पास रखते हैं। घाटा सबमें में बांट देते हैं और मुश्किल वक्त में राहत पैकेज की डिमांड करते हैं।


उन्होंने कहा कि सरकारी मदद ऐसे समय में की जा सकती है जब कोई सेक्टर बढ़ रहा हो। सुब्रमण्यम ने समझाते हुए कहा, मैं कहूंगा कि इंडिया में प्राइवेट सेक्टर की शुरुआत 1991 से हुई। इस हिसाब से यह सेक्टर 30 साल का है। 30 साल के इस सेक्टर के लिए अब वक्त है कि वह कहे कि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। मुझे पापा के पास जाने की जरूरत नहीं है। 


उन्होंने कहा, हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। अब हम मार्केट इकोनॉमी हैं। इस तरह की इकोनॉमी में अगर कोई एसेट संभाल नहीं सकता तो उसे किसी दूसरे को दे दिया जाता है।


इस साल इकोनॉमी सर्वे में भी सुब्रमण्यम ने सलाह दी थी कि सरकार को कंपनियों को इंसेंटिव नहीं देना चाहिए। ऐसा होने पर वे हमेशा स्टार्टअप ही रह जाते हैं।


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