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बैंकों को घोटाले का पता 55 महीनों बाद चलता है: RBI की एनुअल रिपोर्ट

बैंक ने फिस्कल ईयर 2018-19 के लिए जो एनुअल रिपोर्ट जारी की है, उसमें बताया है कि बैंकों में घोटाले 15% बढ़ गए हैं।
अपडेटेड Aug 31, 2019 पर 13:13  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कुछ साल पहले विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी ने बैंकों को तगड़ा चूना लगाया था। 2008 से लेकर 2019 के बीच भारतीय बैंकों को 53,334 करोड़ रुपए का चूना लगा था। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है कि इन घोटालों का खुलासा एक या दो साल में नहीं बल्कि 5 साल में लग पाता है। यानी किसी बैंक को कम से कम 5 साल बाद यह पता चलता है कि उसमें घोटाला हुआ है।


इस बात का खुलासा RBI की एनुअल रिपोर्ट में हुई है। बैंक ने फिस्कल ईयर 2018-19 के लिए जो एनुअल रिपोर्ट जारी की है, उसमें बताया है कि बैंकों में घोटाले 15 फीसदी बढ़ गए हैं। साथ ही बैंकों को इसका पता चलने में 5 साल तक का वक्त लगता है।


फिस्कल ईयर 2017-18 में फर्जीवाड़ों के 5,916 मामलों का पता चला। फिस्कल ईयर 2018-19 में बैंकों में होने वाले फ्रॉड की संख्या बढ़कर 71,543 हो गई है।


हालांकि RBI ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं किया है कि किस वजह से बैंकों में घोटाले बढ़े हैं। RBI ने बताया कि बैंक में घोटाला होने और उसके सार्वजनिक होने में कम से कम 22 महीने लगते हैं। लेकिन बड़े बैंकों में घोटालों का खुलासा होने में ज्यादा वक्त लगता है। 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बड़े घोटाले का पता लगाने में 55 महीने का वक्त लगता है।


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