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RCEP से भारत के निकलने के बाद बोले चीन और जापान- बात करके निकालेंगे हल

RCEP छोड़ने के पीछे भारत का तर्क है कि इस व्यापारिक समझौते में उसके देशहित को नुकसान पहुंचेगा।
अपडेटेड Nov 06, 2019 पर 15:38  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) से निकलने के भारत के फैसले के बाद चीन और जापान ने भारत के साथ मिलकर समस्याओं को दूर करने की कोशिश की बात की है। भारत ने मंगलवार को चीन की अगुवाई वाले RCEP में शामिल होने से मना कर दिया था। भारत का कहना है कि इस व्यापारिक समझौते में उसके देशहित को नुकसान पहुंचेगा।


जापान के ट्रेड मिनिस्टर ने बुधवार को कहा कि टोक्यो इस अग्रीमेंट में भारत सहित सभी देशों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगा। वहीं चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत के लिए RCEP खुला है और चीन, भारत की ओर से उठाई गई दिक्कतों को आपसी समझ के साथ सुलझाने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि भारत RCEP जॉइन करेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड के बैंकॉक में चल रहे रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप के मंच पर अपने भाषण में भारत के RCEP में शामिल न होने की बात कही थी।


भारत ने यह भी कहा है कि वह नेगोसिएशन के लिए तैयार है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि अगर सदस्य देश भारत की समस्याओं को लेकर बेहतर ऑफर देते हैं जो घरेलू उद्योगों के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस देंगे, तो भारत नेगोसिएशन के लिए तैयार है।


बता दें कि इस समझौते में शामिल होने से देश के किसानों और उद्योगों को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही थी। इसको लेकर भारत ने RCEP समझौते में बदलाव की भी मांग की थी लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर भारत ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।


क्या है RCEP समझौता


RCEP सदस्य देशों के बीच एक ट्रेड एग्रीमेंट है। RCEP में आसियान के 10 देश शामिल हैं। आसियान के साथ 6 अन्य देश भी इसमें शामिल हैं। इसमें मेंबर देशों के साथ व्यापार में कई सहूलियतें दी गई हैं। इसमें निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं या फिर कम लगेगा।


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