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राम मंदिर पर आए फैसले के खिलाफ दाखिल सभी पुनर्याचिकाएं खारिज, SC नहीं करेगा सुनवाई

कोर्ट ने गुरुवार को इस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया
अपडेटेड Dec 13, 2019 पर 09:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि वो राजनीतिक तौर पर संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में अपने नौ नवंबर के फैसले पर दोबारा विचार नहीं करेगा। कोर्ट ने गुरुवार को इस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ विवादित भूमि राम लला को सौंपते हुए यहां राम मंदिर के निर्माण के लिए रास्ता साफ कर दिया था।


चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने चैंबर में इन याचिकाओं पर विचार किया और इनमें कोई मेरिट नहीं पाने पर इन्हें खारिज कर दिया। संविधान बेंच के अन्य सदस्यों में जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना खामिल थे।


संविधान बेंच ने सिर्फ उन पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर किया गया जो इस विवाद से संबंधित चार मुकदमों में पक्षकारों की तरफ से आए थे। कोर्ट में दायर 18 पुनर्विचार याचिकाओं में से नौ याचिकाए मूल पक्षकारों ने दायर की थीं, बाकी याचिकाएं तीसरी पार्टी ने दायर की थीं। बेंच ने इनकी याचिकाओं पर विचार करने से मना कर दिया, जिससे इनपर ओपन कोर्ट में सुनवाई का आग्रह भी खारिज हो गया।


फैसले के खिलाफ किसने-किसने दाखिल की थी पुनर्विचार याचिका


शीर्ष अदालत के इस फैसले के खिलाफ सबसे पहले दो दिसंबर को पहली पुनर्विचार याचिका मूल वादी एम सिदि्दक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशहद रशिदी ने दायर की थी।


इसके बाद, छह दिसंबर को मौलाना मुफ्ती हसबुल्ला, मोहम्मद उमर, मौलाना महफूजुर रहमान, हाजी महबूब और मिसबाहुद्दीन ने दायर कीं। इन सभी पुनर्विचार याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन प्राप्त था।


मौलाना सैयद अशहद रशिदी ने 14 बिंदुओं के आधार पर इस फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था और कहा था कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का निर्देश देकर ही इस मामले में पूर्ण न्याय हो सकता है। उन्होंने नौ नवंबर के फैसले के उस अंश पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया था जिसमें केंद्र को तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया गया था।


इसके बाद नौ दिसंबर को दो पुनर्विचार याचिकायें और दायर की गयी थीं। इनमें से एक याचिका अखिल भारत हिन्दू महासभा की थी जबकि दूसरी याचिका 40 से अधिक लोगों ने संयुक्त रूप से दायर की। संयुक्त याचिका दायर करने वालों में इतिहासकार इरफान हबीब, अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक विश्लेषक प्रभात पटनायक, मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर, नंदिनी सुंदर और जॉन दयाल शामिल हैं।


अखिल भारत हिन्दू महासभा ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करके मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित करने के निर्देश पर सवाल उठाये थे। महासभा ने फैसले से उस अंश को हटाने का अनुरोध किया था जिसमें विवादित ढांचे को मस्जिद घोषित किया गया था।


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