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राज्यों ने आयात की हुई प्याज से किया किनारा, केंद्र को प्याज सड़ने की आशंका

केंद्र सरकार राज्यों को 55 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की पेशकश कर रहा है और साथ ही ढुलाई लागत का वहन करने के लिए भी तैयार है।
अपडेटेड Jan 15, 2020 पर 15:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आम जनता को रुलाने वाला प्याज अब केंद्र सरकार को रुला रहा है। देश में प्याज की आसमान चूमती कीमतों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार 18,500 टन प्याज आयात कर चुकी है। जिसे अब लेने के लिए राज्य सरकार मुंह फेर रही हैं। ऐसे में प्याज के सड़ने की आशंका बढ़ गई है।


उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 55 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज दे रही है। साथ ही ढुलाई का खर्च भी वहन करने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार भले ही प्याज का आयात कर सकती है। लेकिन रिटेल सेलिंग का फैसला राज्य सरकारों को करना होता है। हालांकि सरकारी डेटा के मुताबिक, प्याज की रिटेल प्राइस 50 रुपये प्रति किलोग्राम है। देश की राजधानी दिल्ली में प्याज की औसतन कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम है। लेकिन लेकल वेंडर्स इसे 70-80 रुपये प्रति किलो बेच रहे थे। 


पासवान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अभी तक 36 हजार टन प्याज के आयात के लिए समझौते किए गए हैं। जिसमें से 18,500 टन प्याज भारत आ चुका है। लेकिन राज्यों ने अभी तक केवल 2,000 टन प्याज ही उठाया है। लिहाजा अब बची ही प्याज को जल्द ही खत्म करने की चिंता सता रही है। क्योंकि प्याज जल्द ही खरीब होने वाली सब्जी है।


उन्होंने आगे कहा कि कल कोई कोर्ट का दरवाजा न खटखटाने लगे और कहे कि देश में आयात की हुई प्याज सड़ गई है।


बता दें कि पिछले साल दिसंबर महीने में प्याज की कीमत 170 रुपये प्रति किलो पहुंचने से केंद्र सरकार तुर्की और इजिप्ट जैसे देशों से प्याज आयात करने के लिए मजबूर हो गई। इसके बाद नई फसल आने के बाद कीमतों में गिरावट देखने को मिली। 


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