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काम के चलते स्ट्रेस में हैं? इन पांच तरीकों से आसान बनाएं जिंदगी

स्टडीज में सामने आया है कि नौकरीपेशा लोगों में से 50-80 फीसदी लोग स्ट्रेस का शिकार होते हैं
अपडेटेड Aug 08, 2019 पर 10:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

स्ट्रेस इस वक्त के लाइफस्टाइल का सबसे बुरा आउटकम है। लोगों को पता नहीं होता लेकिन वो स्ट्रेस में डूबे होते हैं। वर्क प्रेशर लोगों को स्ट्रेस और डिप्रेशन में ले जाता है।


भारत में नौकरीपेशा लोगों पर हुई स्टडीज में सामने आया है कि इनमें से 50-80 फीसदी लोग स्ट्रेस का शिकार होते हैं।


अगर आप भी काम के प्रेशर में या फिर किसी भी दूसरी वजह से स्ट्रेस में हैं, तो पांच तरीकों की मदद से अपनी लाइफ को थोड़ा रिलैक्स कर सकते हैं और स्ट्रेस से असल में बच सकते हैं।


स्ट्रेस की वजह क्या है?


कभी-कभी हम स्ट्रेस में होते हैं, लेकिन समझ नहीं आता कि असल में सामने कौन सी समस्या खड़ी है, किस समस्या को कैसे प्रायोरटाइज करना है, ये हम नहीं समझ पाते। अपनी प्रॉब्लम्स को प्रायोरटाइज करिए। ऐसे में आपके पास मेंटल क्लैरिटी रहेगी कि आपको काम कहां करना है।


अपनी आदतें बदलिए, टास्क मैनेज करिए


अपनी आदतों को पहचानिए, हो सकता है कि आपके स्ट्रेस और प्रेशर के पीछे आपकी आदतें हों। हो सकता है कि आपका थिंकिंग पैटर्न या प्रेशर हैंडल करने का तरीका आपके लिए परेशानियां खड़ी कर रहा हो। अपनी आदतों पर गौर करिए, साथ ही अपने टास्क मैनेज करना सीखिए। छोटे-छोटे स्टेप उठाइए और अपने सामने खड़े काम के पहाड़ को ऑर्गनाइज करिए। अपना रूटीन फिक्स करिए और उसे फॉलो करिए।


सेल्फ केयर है जरूरी


काम के चक्कर में हम अपना खयाल ही रखना भूल जाते हैं, जबकि सेल्फ-केयर आपकी सबसे पहली प्रायोरिटी होनी चाहिए। सेल्फ केयर से सेल्फ कंट्रोल आता है। खुद पर प्रेशर मत डालिए, ब्रेक लीजिए, खाने-पीने पर ध्यान, निगेटिव थिंकिंग से दूर रहिए। अपनी बाउंड्रीज तय करिए, ओवरबर्डन या ओवरकमिटिंग से बचें। जब कंट्रोल आपके हाथ में होगा तो स्ट्रेस की सिचुएशन नहीं बनेगी।


मदद मांगिए, शेयर करिए


स्ट्रेस का एक बड़ा कारण होता है, चीजें अपने अंदर दबाकर रखना और सबकुछ अकेले हैंडल करने की कोशिश करना। आमतौर पर लोगों की आदत हो गई है, सारी बातें खुद के अंदर दबाकर रखने की। बातें शेयर करने से भी बहुत हल्का महसूस होता है, सब जानते हैं। सबकुछ अकेले हैंडल करने की जरूरत नहीं है।


अपने इमोशंस को मैनिपुलेट करिए और इस्तेमाल करिए


अपने इमोशंस को मैनिपुलेट करके उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी एंक्जाइटी, नर्वसनेस को एक्साइटमेंट और अपॉर्चुनिटी के तौर पर लीजिए। अपने इमोशन को दूसरा नाम देने से आप उसे उसी तरह ट्रीट करेंगे। इससे आपकी एनर्जी बदलेगी और आप अपनी एनर्जी का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे।


ये कुछ तरीके हैं, जिससे आप खुद अपना माइंडसेट बदल सकेंगे और अपने लिए चीजें आसान कर पाएंगे।


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