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NEET रिजर्वेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, कहा- आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले राजनीतिक दलों से कहा है कि आप याचिका वापस लीजिए और मद्रास हाईकोर्ट जा सकते हैं
अपडेटेड Jun 12, 2020 पर 08:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आरक्षण के एक मामले में सुनवाई करते हुए एक बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक कानून है। दरअसल, DMK-CPI-AIADMK समेत तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों ने मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी को 50 फीसदी आरक्षण के मामले पर याचिका दायर की थी। जिस पर अदालत ने अपनी टिप्पणी करके सुनवाई करने से मना कर दिया।


कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियां राज्य के OBC के कल्याण के एक साथ मिलकर आगे आई हैं, यह नॉर्मल बात है। लेकिन आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। जस्टिस राव ने कहा कि सभी यचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से वापस लीजिए और मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल करें।


हालांकि, इस दौरान टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें खुशी है कि एक मसले पर सभी राजनीतिक दल एक साथ आएं हैं, लेकिन हम इस याचिका को नहीं सुनेंगे। लेकिन हम इसे खारिज भी नहीं कर रहे हैं और आपको सुनवाई का मौका हाई कोर्ट के सामने दे रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की। सभी राजनीतिक दलों ने केंद्र द्वारा ऑल इंडिया कोटा के तहत तमिलनाडु में अंडर ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स में OBC को 50 फीसदी कोटा ना दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। 


बता दें कि तमिलनाडु में OBC, SC, ST के लिए 69% रिजर्वेशन है। इसमें OBC का हिस्सा 50 फीसदी है। 


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