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ईंधन की बढ़ती कीमतों पर समझ रहे हैं उपभोक्ताओं का दर्द, पर धर्मसंकट में सरकार- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।
अपडेटेड Mar 05, 2021 पर 19:16  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं  को परेशानी हो रही है। सरकार इस बात को समझती है लेकिन सरकार के लिए ये धर्मसंकट जैसी स्थिति है।


उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र दोनों ही ईंधन से अपना रेवेन्यू वसूलते है इसलिए राज्यों और केंद्र दोनों को मिलकर इस बात पर सोचना चाहिए। उन्होंने ये बातें Indian Womens Press Corps (IWPC) के दौरान मीडिया से कहीं।


उन्होंने आगे कहा कि मेरा यह कर्तव्य है कि मैं लोगों को ईंधन पर लगने वाले टैक्स के बारे में बताऊं। अभी तक हमें देश के किसी भी राज्य के चीफ मिनिस्टर से फ्यूल टैक्स पर चर्चा करने का मौका नहीं मिला है।


मुझको इस बात का निर्णय लेना पड़ सकता है कि क्या अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक में  ईंधन की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा जाए।


बता दें कि गुरुवार को एसबीआई के इकोनॉमिस्ट ने कहा था कि अगर पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में ले लिया जाए तो पूरे देश में इसकी कीमतें 75 रुपये के आसपास आ सकती है लेकिन इसके लिए देश  में राजनैतिक इच्छाशक्ति का अभाव है जिसकी वजह से देश में ऑयल प्रोडक्ट की कीमतें आसमान पर बनी हुई हैं।


अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर ग्लोबल क्रूड प्राइस 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 73 रुपये के आसपास रहती है तो डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने से इसकी कीमत 68 रुपये प्रति लीटर के आसपास आ जाएगी और ऐसा करने से केंद्र और राज्य सरकारों को सिर्फ 1 लाख करोड़ या  जीडीपी का 0.4 फीसदी राजस्व घाटा होगा।


बता दें कि आज यानी शुक्रवार को देश के मेट्रो शहरों में फ्यूल की कीमतों में लगातार 6वें दिन कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 91.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत  81.47  रुपये प्रति लीटर  पर रहीं।


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