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US ने चीन के साथ पहले चरण की ट्रेड डील पर किए हस्ताक्षर

अमेरिका और चीन के बीच चला तकरीबन 2 साल का ट्रेड वॉर खत्म हो गया। दोनों देशों ने मिलकर फिर से ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
अपडेटेड Jan 16, 2020 पर 16:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पूरी दुनिया में छाई आर्थिक सुस्ती के बीच अमेरिका-चीन ने फिर से हाथ मिला लिया है। तकरीबन 2 साल से ट्रेड वॉर की मार झेल रहे दोनों देशों ने ट्रेड डील के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐतिहासिक बताया है। दुनिया की टॉप 2 अर्थव्यवस्था में शामिल चीन और अमेरिका के ट्रेड वॉर के बाद डील करने के लिए एक साल से अधिक लंबी बातचीत चली। इस डील के तहत चीन को 200 अरब डॉलर का सामान अमेरिका से खरीदना होगा।


पिछले साल दिसंबर 2019 से ही दोनों देश ट्रेड डील करने की दिशा में आगे बढ़ना शुरु कर दिए थे। इस नई डील के पहले चरण के तहत अमेरिका ने चीन से इम्पोर्ट होने वाले सामान पर लगाए गए कुछ नए टैरिफ को वापस लेने की घोषणा की है। इसके एवज में चीन अगले दो साल में अमेरिका से 200 अरब डॉलर का सालाना सामान खरीदेगा। जिसमें से 50 अरब डॉलर के एग्रीकल्चर प्रोडक्ट भी शामिल हैं। इन प्रोडक्ट की बिक्री से अमेरिका में होने वाले चुनाव ट्रंप मुद्दा बना सकते हैं।


ट्रेड डील में हस्ताक्षर होने के साथ ही अमेरिका ने चीन को करेंसी से छेड़छाड़ (करेंसी मैनुपुलेटर) करने वाली लिस्ट से हटा दिया है। इससे पहले अमेरिका ने चीन को इस लिस्ट में डाल दिया था।


US-चीन डील के पहले चरण के एग्रीमेंट में बौद्धिक संपदा संरक्षा और प्रवर्तन (Intellection Property Protection and Enforcement), जबरन टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर खत्म करना (Ending Forced Technology Transfer), अमेरिकी कृषि के विस्तार (Expansion of American Agriculture), अमेरिकी फाइनेंशियल सर्विस से बैरियर हटाना (Removing Barriers to American Financial Services), करेंसी के साथ छेड़छाड़ खत्म करना (Ending Currency Manipulation) US-चीन ट्रेड डील को फिर से संतुलित करना (Rebalancing the US-China Trade Relationship) और समस्याओं का प्रभावी समाधान निकालना (Effective Dispute Resolution) शामिल है।
इस डील में हस्ताक्षर करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जल्द ही चीन का दौरा करूंगा और अपने चीनी समकक्ष को धन्यवाद दूंगा। ट्रंप ने काह कि इस डील से दोनों देशों को फायदा होगा।


दरअसल दोनों देशों के बीच जनवरी 2018 में ट्रेड वॉर शुरु हो गया था। फिर दोनों देशों ने एक दूसरे के प्रोडक्ट पर जमकर टैरिफ लगाया। जिससे दोनों के बीच रिश्तों में खटास आ गई। अमेरिका ने चीन के ऊपर टेक्नोलॉजी चोरी करने का आरोप लगाया था। हालांकि इन सभी आरोप-प्रत्यारोप को दरकिनार करके दोनों देश अब आगे बढ़ गए हैं।


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