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आवाज़ अड्डाः सामान्य वर्ग को 10% कोटा, बनेगा हथियार!

प्रकाशित Thu, 10, 2019 पर 07:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को 10 फीसदी आरक्षण का तोहफा दे दिया है। ये लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया फैसला है। लेकिन इसने देश में नौकरियों पर नई बहस छेड़ दी है। केंद्र सरकार के पास देने के लिए नौकरियां नहीं हैं। इसलिए राजनीतिक दल प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में भी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं। सरकार आरक्षण के पीछे सामाजिक न्याय की बात कह रही है। सवाल ये है कि क्या निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी आरक्षण मिलना चाहिए? और क्या इससे आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सामाजिक न्याय मिल जाएगा?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण की गूंज सुनाई देने लगी है। विपक्ष यही आशंका जता रहा है कि सामान्य वर्ग के गरीबों को जो 10 फीसदी का रिजर्वेशन दिया जा रहा है उसका मकसद चुनाव में वोट जुटाना है।


विपक्ष के कई सवाल आर्थिक पैमाने को लेकर भी हैं। बिल में आरक्षण देने के लिए पांच मानक तय किए हैं। इसमें सालना 8 लाख रुपए से कम आय, 5 एकड़ से कम खेती की जमीन और एक हजार स्क्वायर फीट से कम घर की शर्त शामिल है। आलोचक कह रहे हैं कि ये सवर्ण अमीरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। और सरकार को भी इससे गुरेज नहीं है। समाजवादी पार्टी और आरजेडी जैसे विपक्षी दल आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। सरकार के सहयोगी औक केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान इस कहानी में नया ट्विस्ट ले आए हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार के पास नौकरियों की कमी है। इसलिए वो प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों और न्यायापालिका में आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं।


सवाल ये है कि सरकारी नौकरियां नहीं हैं, तो क्या इसका फायदा देने के लिए कोटा सिस्टम प्राइवेट सेक्टर में भी लागू कर देना चाहिए? ये चुनावी रणनीति का हिस्सा है इससे तो बीजेपी के नेता भी इनकार नहीं करेंगे क्योंकि पीएम की सभाओं में रिजर्वेशन का मामला उठने लगा है। सवाल ये है कि सामान्य वर्ग को इससे फायदा होगा या नुकसान? और क्या आने वाले दिनों में हम जाति के अनुपात में रिजर्वेशन देने की मांग को जोर पकड़ता देखेंगे?