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दिल्ली की हिंसा का कसूरवार कौन, पुलिस ने एक्शन लेने में क्यों की देरी!

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा भड़कने के बाद हालात का जायजा लेने के लिए अब खुद नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल सड़क पर उतर आए हैं।
अपडेटेड Feb 27, 2020 पर 12:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा भड़कने के बाद हालात का जायजा लेने के लिए अब खुद नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल सड़क पर उतर आए हैं। उन्होंने हिंसा प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों से बात की। वो बीच-बीच में पुलिस वालों को भी निर्देश देते नजर आए। उन्हें भरोसा है कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा।


डोवाल से लोगों ने अपनी आपबीती भी सुनाई। कुछ लोगों को पुलिस से शिकायत थी। NSA ने उन्हें अपनी जुबान दी कि अब कुछ दिक्कत नहीं होगी।


इस बीच दिल्ली में हिंसा को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिंसा के लिए केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग भी कर दी। वो दिल्ली में हिंसा के पीछे साजिश बता रही हैं।


आम आदमी पार्टी भी हिंसा के लिए बीजेपी और गृह मंत्री अमित शाह को ही जिम्मेदार ठहरा रही है। AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को तो दिल्ली की हिंसा गुजरात दंगों की याद दिला रही है।


बीजेपी ने भी कांग्रेस के ऊपर चौतरफा हमला बोल दिया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस हिंसो को लेकर गंदी राजनीति कर रही है। इससे पुलिस का मनोबल गिरता है। बीजेपी कांग्रेस को 1984 के सिख दंगों की याद दिला रही है।


सियासत के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट किया कि ये जरूरी है कि जल्द से जल्द हालात सामान्य हों। इधर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को कपिल मिश्रा समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वो दिल्ली में एक और 1984 का दंगा नहीं होने देंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली पुलिस के रोल पर सवाल खड़े किए हैं। शाहीन बाग के प्रदर्शन पर मौजूदा हालात में वो सुनवाई को तैयार नहीं है। अगली सुनवाई अब 23 मार्च को होगी। सवाल ये है कि आखिर दिल्ली में हिंसा किसने भड़काई? और क्या ये हिंसक वारदातें साजिश के तहत की गईं? क्या दिल्ली पुलिस ने हिंसा को रोकने में देरी की? बीजेपी ने अपने भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं को क्यों खुला छोड़ रखा है? और क्या ऐसे संजीदा माहौल में राजनीतिक पार्टियों को ज्यादा जिम्मेदारी नहीं दिखानी चाहिए? इस मुद्दे पर आवाज़ अड्डा पर हो रही है बड़ी चर्चा।


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