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8 महीनों बाद हुआ खुलासा, अखिलेश के कहने पर माया ने वापस ले लिया था मुलायम पर दर्ज गेस्ट हाउस केस

लोकसभा चुनावों से पहले अखिलेश यादव के कहने पर माया ने मुलायम के खिलाफ यह केस वापस ले लिया था
अपडेटेड Nov 08, 2019 पर 14:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जब इस साल के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन किया तो लोगों को 1995 का गेस्ट हाउस कांड याद आ गया था। मुलायम सिंह यादव के राज में मायावती के साथ हुई उस बदसलूकी का केस अभी भी चल रहा है और इसकी चर्चा इसलिए कि मायावती ने मुलायम सिंह यादव पर भी केस दर्ज करवाया था। लेकिन अब आठ महीनों बाद यह जानकारी सामने आई है कि चुनावों से पहले अखिलेश यादव के कहने पर माया ने मुलायम के खिलाफ यह केस वापस ले लिया था।


News18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इन दोनों पार्टियों के गठबंधन के लिए साथ आने के बाद मुलायम सिंह यादव के ऊपर से यह केस फरवरी में वापस लिया गया था। अखिलेश यादव ने मायावती से एक गुडविल जेस्चर के तौर पर अपने पिता के ऊपर से यह केस वापस लेने का आग्रह किया था। लेकिन यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। हालांकि, मुलायम सिंह के अलावा मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ केस चलता रहेगा।


दोनों पार्टियों ने लोकसभा चुनावों के लिए 12 जनवरी को साथ आई थीं। लखनऊ में माया ने अखिलेश के साथ पहली बार जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वो इस केस में माफ करने और भूलने को तैयार हैं।


हालांकि, इस गठबंधन ने इन चुनावों में कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया और चुनाव खत्म होने के कुछ वक्त बाद ही मायावती ने अखिलेश की पार्टी से नाता तोड़ लिया।


क्या था गेस्ट हाउस कांड?


यह केस उत्तर प्रदेश की राजनीति के इतिहास का एक काला पन्ना है। 2 जून, 1995 को बीएसपी के फाउंडर कांशीराम ने उस वक्त की मुलायम सरकार से अपने दो सालों के गठबंधन को वापस ले लिया। इसके बाद मायावती को यूपी गेस्ट हाउस समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों ने घेर लिया था और उनके साथ बदसलूकी की थी। उस वक्त बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी मदद की थी। तबसे 26 सालों तक दोनों पार्टियां एक दूसरे की दुश्मन बनी रहीं और इस साल अखिलेश माया ने आखिरकार गठबंधन किया, जिसे जनता ने नकार दिया।



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