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लोकसभा में Article 370 पर बहस, जानिए किसने क्या कहा

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार के सामने कई सवाल किए।
अपडेटेड Aug 06, 2019 पर 17:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने और J&K Reorganisation Bill पर चर्चा के दौरान बीजेपी-नीत एनडीए सरकार और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार के सामने कई सवाल किए।


जानिए मंगलवार को लोकसभा में इस बिल पर किसने क्या कहा-


लोकसभा में ये बिल पेश करके गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर कहने का मतलब पीओके और अक्साई चिन भी है और कश्मीर के लिए हम अपनी जान भी दे देंगे।


कांग्रेस की ओर से मनीष तिवारी और अधीर रंजन चौधरी ने अपनी बात रखी।


अधीर रंजन चौधरी ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा कैसे है? उन्होंने कहा कि 1948 से ही इस मामले को UN देख रहा है, तो क्या यह आंतरिक मामला है? हमने शिमला अग्रीमेंट और लाहौर डेक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, ये एकतरफा पक्ष है या द्विपक्षीय?


मनीष तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान में  बस आर्टिकल 370 ही नहीं, आर्टिकल 371 A to I भी है, जिसके तहत नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश और सिक्किम को विशेष अधिकार मिले हुए हैं। आज जब आप आर्टिकल 370 हटा रहे हैं तो आप इन पूर्वोत्तर राज्यों को क्या मैसेज भेज रहे हैं?


तिवारी ने पूछा कि क्या आप इन राज्यों को ये संदेश दे रहे हैं कि आप कल को आर्टिकल 371 हटा देंगे? क्या आप इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाकर और इनकी विधानसभा की शक्तियों का संसद में उपयोग करके यहां से आर्टिकल 371 हटा देंगे? आप किस तरह का संवैधानिक उदाहरण स्थापित कर रहे हैं?


वहीं मनीष तिवारी ने ये भी कह दिया कि जम्मू-कश्मीर को नेहरू ने भारत में मिलाया था, जिसपर बीजेपी ने आपत्ति जताई।


फारूक अब्दुल्ला के सदन में न रहने पर एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले और डीएमके के दयानिधि मारन ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला कहां हैं? उनके बिना ये बहस अधूरी रहेगी।


वहीं लद्दाख से लोकसभा सांसद त्सेरिंग नमग्याल ने कहा कि लद्दाख पहले से केंद्रशासित प्रदेश होने को लेकर मांग करता रहा है और इस सरकार ने ये मांग पूरी की है। इसके लिए लद्दाख में सभी पार्टियों ने अपनी सहमति दी थी।


उधर कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दो दिनों से नजरबंद करके रखा गया था और उनसे कोई मिलने तक भी नहीं आ सकता था। उन्होंने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये क्या हो रहा है? सरकार का ये फैसला तानशाही है। अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था कि भारत कश्मीर के लोगों के साथ ऐसा करेगा। उन्होंने कहा कि ये लूट है। बीजेपी हर कश्मीरी से अलगाववादी की तरह बर्ताव कर रही है।