आवाज़ अड्डाः केजरीवाल की धरना पॉलिटिक्स, बनेगी बात! -
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आवाज़ अड्डाः केजरीवाल की धरना पॉलिटिक्स, बनेगी बात!

प्रकाशित Tue, 12, 2018 पर 20:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अरविंद केजरीवाल और धरना प्रदर्शन - दोनों का चोली-दामन का साथ है। इस बार केजरीवाल ने अपने तीन मंत्रियों के साथ दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के घर में ही धरना दे दिया है। चार महीने पहले आरोप लगा कि केजरीवाल ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश को थप्पड़ मारा, तभी से दिल्ली के आईएएस अफसर आंशिक हड़ताल पर हैं और सरकारी कामकाज करीब करीब ठप हो गया है। अब उप-राज्यपाल को घेरने के लिए केजरीवाल को फिर से धरना पॉलिटिक्स याद आई है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आईएएस बनाम दिल्ली सरकार क्या केजरीवाल के लिए अहं की लड़ाई बन गई है।


दिल्ली में केजरीवाल सरकार की धरना पॉलिटिक्स फिर से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री केजरीवाल खुद धरने पर हैं, टकराव उप-राज्यपाल से है। लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर है क्योंकि दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश को थप्पड़ मारने की वजह से पहले ही आईएएस अफसर आंशिक हड़ताल पर हैं। केजरीवाल के मुताबिक आईएएसअफसर जरूरी फाइलें निपटाने के अलावा कोई काम नहीं कर रहे। इसकी वजह से लोगों की भलाई के कई काम प्रभावित हो रहे हैं। केजरीवाल ने आईएएस अफसरों को एलजी हाउस की तरफ से धमकी मिलने का आरोप भी लगा दिया । 


केजरीवाल की एलजी से मांग है कि वो काम रोकने वाले आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। इसके अलावा केजरीवाल ने लोगों के घर तक राशन की होम डिलिवरी देने वाली स्कीम को मंजूरी देने की भी मांग की।


केजरीवाल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और पुलिस को दिल्ली सरकार के तहत लाने की मांग भी करते रहे हैं। लेकिन अब बीजेपी ने केजरीवाल के मांग करने के तरीके पर ही सवाल खड़ा कर दिया है ।


बीजेपी ने दिल्ली में लोकपाल की नियुक्ति नहीं करने पर भी केजरीवाल को घेरा। बीजेपी के मुताबिक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कई मामलों में पूछताछ चल रही है जिसमें भ्रष्टाचार के मामले, चीफ सेक्रेटरी को थप्पड़ मारना और पीडब्ल्यूडी घोटाला शामिल हैं। दिल्ली में सीलिंग के मामले पर भी केजरीवाल सरकार और एलजी के बीच मतभेद था। केजरीवाल भी एलजी पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में केंद्र के इशारे पर केजरीवाल सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा। या फिर केजरीवाल चुनावी साल में धरना प्रदर्शन करने की अपनी पुरानी पॉलिटिक्स पर लौट रहे हैं।