Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज अड्डाः राफेल पर छिड़ी जुबानी जंग, निकलेगा हल!

प्रकाशित Fri, 04, 2019 पर 08:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राफेल विमान के सौदे पर हंगामा जारी है। कांग्रेस इसे मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के बड़े मामले के तौर पर पेश कर रही है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट का कवच हासिल है। उसका आरोप है कि मोदी सरकार ने तीन गुना से ज्यादा कीमत देकर सौदा किया है और एक खास बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाया है। कांग्रेस चाहती है कि राफेल डील की जांच संयुक्त संसदीय समिति- जेपीसी करे। सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। वो सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। देश की सुरक्षा जरूरतों और सुरक्षा करारों की गोपनीयता की बात कर रही है। लेकिन इस हंगामे में ये कहना मुश्किल है कि किसका पक्ष सही है। सवाल ये है कि कांग्रेस ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं क्या वो महज चुनावी स्टंट है। डील को लेकर जो संदेह पैदा करने में कामयाब हुई है क्या इससे मोदी की छवि को नुकसान पहुंचेगा।


लोकसभा में राफेल के मुद्दे पर चर्चा क्या शुरू हुई, मानो सरकार और कांग्रेस के बीच युद्ध छिड़ गया हो। लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से शुरू हुए सिलसिले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। राहुल गांधी राफेल को लेकर सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं और उनके निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। हमला तेज करते हुए मोदी से कांग्रेस प्रमुख ने ट्वीट करके चार सवाल पूछे हैं।उन्होंने पूछा है कि वायु सेना को 126 विमानों की जरूरत तो 36 विमान क्यों? दूसरा सवाल - एक विमान की कीमत 560 करोड़ रुपए की जगह 1,600 करोड़ क्यों? तीसरा सवाल- मोदी जी बताएं कि पर्रिकर जी अपने बेडरूम में राफेल की फाइल क्यों रखते हैं और उसमें क्या है? और चौथा सवाल - एचएएल की जगह एए क्यों?


प्रधानमंत्री मोदी राफेल डील के लेकर लोकसभा में जवाब दे चुके हैं। लेकिन इसकी कीमत का सीधे तौर पर कोई ब्यौरा नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट राफेल डील की प्रक्रिया को सही ठहरा चुका है। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मोदी और राहुल के बीच जुबानी जंग चल रही है।


कांग्रेस ने एक ऑडियो टेप जारी करके कहानी में नया ट्विस्ट ला दिया है। कांग्रेस के मुताबिक ऑडियो टेप में गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे बता रहे हैं कि राफेल सौदे की फाइल पर्रिकर के बेडरूम में पड़ी हुई है। टेप को फर्जी बताते हुए राणे ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली कह रहे हैं कि झूठ बोलने की विरासत हासिल करने वाले राहुल देश को गुमराह कर रहे हैं।


असल में आप किसे सच मानते हैं किसे झूठ- ये अब काफी हदतक इसपर निर्भर है कि आप किस पार्टी के ज्यादा करीब हैं। चौकीदार चोर है का नारा लगा कर राहुल ने जब मोर्चा खोला है तो कांग्रेस के नैरेटिव की पूरी कामयाबी इस बात से आंकी जाएगी कि क्या मोदी की ईमानदार छवि को नुकसान पहुंचा है। क्या जो लोग किसी पाले में नहीं खड़े हैं उनके मन में प्रधानमंत्री को लेकर संदेह पैदा हुआ है। या सरकार को जेपीसी की मांग मान लेनी चाहिए और अपना पक्ष ऐसे पेश करना चाहिए कि उसके पास छुपाने को कुछ नहीं है। क्योंकि पब्लिक लाइफ में खेल- सच झूठ से ज्यादा धारणा का, परसेप्शन का है। राफेल को लेकर क्या यही खेल चल रहा है?