Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डा: मूर्ति की राजनीति से भी मिलता है वोट!

प्रकाशित Wed, 07, 2018 पर 20:30  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश में मूर्तियों पर बवाल मचा हुआ है। वैसे मूर्ति तोड़ने या उसका अपमान कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब इसपर संसद में हंगामा होने लगे, प्रधानमंत्री को खुद बयान जारी कर सख्त चेतावनी देनी पड़े और गृह मंत्रालय से राज्यों को एडवाइजरी जाए तो बात की गंभीरता समझी जा सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या मूर्तियां तोड़ना कुछ उन्मादी लोगों की करतूत है जो विरोधी विचारों को नीचा दिखाना चाहते हैं या फिर इसे अपने खेमे को खुश करने का कोई नया राजनीतिक तरीका बनाया जा रहा है!


त्रिपुरा के बेलोनिया में लेनिन की मूर्ति गिराई गई तो राज्य के कई हिस्सों में हिंसा फैल गई, धारा 144 लगानी पड़ी। लेकिन राज्य के गवर्नर तथागत रॉय ने ट्वीट किया कि लोकतांत्रिक रुप से चुनी हुई एक सरकार अगर कुछ बना सकती है तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई दूसरी सरकार उसे खत्म भी कर सकती है। मूर्ति गिराने की आलोचना करने वालों ने बीजेपी पर बदले की राजनीति का आरोप लगाया। यहां तक कि संसद में भी हंगामा हुआ। इसी बीच तमिलनाडु में पेरियार, कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और मेरठ में बाबासाहेब की मूर्तियों के अपमान की खबर भी आ गई। कुल मिलाकर माहौल ऐसा बना कि प्रधानमंत्री की तरफ से बयान जारी कर मूर्तिभंजकों को कड़ी चेतावनी दी गई और गृह मंत्रालय ने राज्यों को खास निर्देश जारी किए।


प्रधानमंत्री के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट किया कि बीजेपी से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ऐसी गतिविधि में पकड़ा गया तो उसपर कार्रवाई की जाएगी। जबकि एक दिन पहले खुद अमित शाह ने पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एच राजा पर कार्रवाई करने से मना कर दिया था। एच राजा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि लेनिन के बाद पेरियार की बारी है। इसके बाद तमिलनाडु में पेरियार की मूर्ति पर हमला हुआ और बवाल मचा था। अब एच राजा ने इस पोस्ट की जिम्मेदारी अपने पेज के एडमिन पर डाल कर माफी भी मांग ली है।


लेकिन राजा की माफी या प्रधानमंत्री की चेतावनी के बावजूद विपक्ष बीजेपी को छूट देने को तैयार नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि त्रिपुरा के गवर्नर अभी भी मूर्ति तोड़ने वालों के पक्ष में ट्वीट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की निंदा अपनी जगह ठीक है लेकिन भड़काऊ बयान देने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। सवाल ये है कि क्या देश में राजनीतिक विरोध अब दुश्मनी में तब्दील होता जा रहा है? मूर्तियां गिराना क्या इसी उग्र राजनीतिक मानसिकता का नमूना है! इन्हीं सवालों के जवाब के खोज की कोशिश है आज का आवाज़ अड्डा।