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आवाज अड्डाः सोनिया गांधी के हाथ कांग्रेस की कमान, क्या अब होगी नैया पार!

कौन बनेगा कॉंग्रेस का अध्यक्ष? राहुल गांधी के इस्तीफे के एक महीने दस दिन बाद भी ये सवाल खुला हुआ है।
अपडेटेड Aug 14, 2019 पर 11:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कौन बनेगा कॉंग्रेस का अध्यक्ष? राहुल गांधी के इस्तीफे के एक महीने दस दिन बाद भी ये सवाल खुला हुआ है। लेकिन पार्टी ने इसका एक फौरी हल तो निकाल ही लिया है। नए अध्यक्ष के नाम पर कांग्रेस के अंदर कई दिनों से मंथन चल रहा था। युवा और बुजुर्ग नेताओं की राय बंटी हुई थी। युवाओं के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के नाम भी सामने आने लगे थे। लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया है। सोनिया गांधी के सामने कई चुनौतियां हैं जिनसे उन्हें एक साथ निपटना होगा। सवाल ये है कि क्या सोनिया गांधी कांग्रेस को राजनीतिक संकट से उबार पाएंगी?


राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस को नया मुखिया मिल गया है। लेकिन जैसा वो चाहते थे वैसा नहीं। राहुल गांधी ने गांधी परिवार के बाहर से कांग्रेस अध्यक्ष चुनने की बात कही थी। लेकिन लंबी जद्दोजहद के बाद भी कांग्रेस वर्किंग कमिटी की सुई गांधी परिवार पर ही अटकी रही। CWC ने एक बार फिर सोनिया गांधी के नाम पर भरोसा जता दिया। उन्हें कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है।


72 साल की सोनिया गांधी 19 साल तक कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनके नेतृत्व में जबरदस्त परफॉर्म किया। सोनिया गांधी ऐसे समय पर अंतरिम अध्यक्ष बनी हैं जब कांग्रेस अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट कर रह गई है। जबकि सिर्फ 4 राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में उसकी सरकार है।


सोनिया गांधी के सामने कांग्रेस को संकट के दौर से उबारने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काट ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती होगी। कांग्रेस के अंदर टूट और बिखराव को रोकना, युवा और बुजुर्ग नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद दूर करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जमीन पर नए कार्यकर्ता जोड़कर संगठन को मजबूत करना होगा। इसके अलावा अनुच्छेद 370 जैसे बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की लाइन तय करना और विवादित बयान देने वाले नेताओं पर भी लगाम कसनी होगी।


कांग्रेस के नेता सोनिया गांधी से पुराने करिश्मे की उम्मीद कर रहे हैं। बीजेपी कांग्रेस में परिवारवाद को लेकर सवाल उठाती रही है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी फेल हो गए हैं।


लेकिन सोनिया गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से ये बात साफ हो गई है कि गांधी परिवार के बाहर पार्टी का गुजारा नहीं है। इससे ये बात भी तय हो जाती है कि पार्टी में लीडरशिप देने के लिए काबिल नेता नहीं हैं। तो क्या राहुल गांधी को ये बात पता नहीं थी या वो इसी बात को अंडरलाइन करना चाहते थे? सवाल ये है कि सोनिया गांधी के नेतृत्व को पार्टी ने कमजोर होते देखा है। पार्टी जब अपने मुश्किल दौर से गुजर रही है तो क्या अब सोनिया गांधी कोई करिश्मा करेंगी?