आवाज़ अड्डाः ईवीएम बनाम बैलट पेपर, कौन मारेगा बाजी! -
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आवाज़ अड्डाः ईवीएम बनाम बैलट पेपर, कौन मारेगा बाजी!

प्रकाशित Sat, 04, 2018 पर 11:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

2019 के चुनाव बैलट पेपर से कराने के लिए विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं। इस बारे में कांग्रेस समेत 17 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग से मिलने की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में हुए उपचुनावों में ईवीएम के बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गई थीं। विपक्ष बीजेपी पर ईवीएम में गड़बड़ी कराने का आरोप भी लगाता रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश बैलट सत्याग्रह करने की चेतावनी दे चुके है। लेकिन चुनाव आयोग बैलट पेपर से चुनाव कराने के मूड में नहीं है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या चुनाव आयोग को ईवीएम के बजाए बैलट पेपर से चुनाव कराना चाहिए?


आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानि ईवीएम बनाम बैलट पेपर की जंग तेज हो सकती है । ज्यादातर विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि 2019 का चुनाव ईवीएम के बजाए बैलट पेपर से होना चाहिए। इस मांग के साथ 17 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग से मिलने की तैयारी कर रही हैं।


मतदान के दौरान ईवीएम खराब होने की शिकायतें तो मिलती रही हैं। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनावों में बड़े पैमाने पर ईवीएम खराब होने की घटनाओं से हड़कंप मच गया था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मामले पर बैलट सत्याग्रह करने की चेतावनी दे चुके हैं। विपक्ष का आरोप है ईवीएम में बड़ा खेल हो रहा है और बैलट पेपर से ही निष्पक्ष चुनाव हो सकते हैं।


ईवीएम के मुद्दे पर बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी विपक्ष के साथ खड़ी दिख रही है । उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वो चाहते हैं कि बीजेपी एक बार बिना ईवीएम के बैलट पेपर के जरिए चुनावी मैदान में उतरे। लेकिन बीजेपी का कहना है कि विपक्षी पार्टियां अपनी हार के डर से ऐसे आरोप लगा रही हैं।


चुनाव आयोग बैलट पेपर से चुनाव कराने की संभावनाओं को खारिज कर चुका है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या विपक्ष चुनाव में हार की आशंका के डर से बैलट पेपर से चुनाव की मांग कर रहा है? विपक्षी पार्टियों की शिकायत पर चुनाव आयोग ने ईवीएम हैक करने की चुनौती भी दी थी। लेकिन तब किसी पार्टी ने ये चुनौती स्वीकार नहीं की थी। चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव के लिए वोटर वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानि वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल भी बढ़ा रहा है। बैलट पेपर से चुनाव कराने का रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं रहा है। बूथ कैप्चरिंग की वारदातों से चुनाव पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में क्या नया तरीका छोड़कर पुराने तरीके से चुनाव कराना सही होगा?