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आवाज़ अड्डाः GDP डाटा पर सुब्रमणियन के दावों में कितना दम!

प्रकाशित Thu, 13, 2019 पर 08:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश की तरक्की के आंकड़ों को लेकर एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है। इस बार ग्रोथ पर सवाल उठाए हैं पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने। सुब्रमणियन का दावा है कि 2011-12 से 2016-17 के बीच जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी के बजाए साढ़े 4 फीसदी ही बढ़ी है। खास बात ये है कि सुब्रमणियन 2014 से 2018 के बीच मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। तब उन्होंने ग्रोथ के आंकड़ों पर कभी सवाल नहीं उठाए। सरकार ने भी सफाई दे दी है कि ग्रोथ के आंकड़े सही हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री के इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल ने सुब्रमणियन के ग्रोथ अनुमान की जांच करने की बात कह दी है। सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि विदेश जाते ही सुब्रमणियन को जीडीपी के आंकड़ों में गड़बड़ी नजर आने लगी है। क्या ग्रोथ के आंकड़ों पर सवाल उठाने के पीछे कोई वाजिब वजह है या फिर ये सुब्रमणियन की सरकार को बदनाम करने की कोशिश है।


जीडीपी के मामले में भारत फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुका है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनाने की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार के ही पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ग्रोथ के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में छपे एक रिसर्च पेपर में जीडीपी की नई सीरीज के आंकड़ों में कई कमियां गिनाई हैं। उनका कहना है कि साल 2011-12 से 2016-17 के बीच जीडीपी आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया। इस दौरान जीडीपी की औसत ग्रोथ 7 परसेंट नहीं बल्कि साढ़े 4 फीसदी ही रही।


सुब्रमणियन ने जिन 6 साल का जिक्र किया है उसमें यूपीए सरकार के तीन और मोदी सरकार के तीन साल शामिल हैं। सुब्रमणियन खुद 2014 से 2018 के बीच मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। सुब्रमणियन के आंकड़े पर कांग्रेस को सरकार की आलोचना करने का मौका मिल गया। कांग्रेस ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने जीडीपी गणना के नए फॉर्मूले को गलत माना है। भाजपा सरकार ने इसी फॉर्मूले के तहत 7 फीसदी जीडीपी का दावा किया था, जबकि वो वास्तव में 4.5% ही थी। विकास के मोर्चे पर देश को अंधेरे में रखना उचित नहीं है।


वहीं सरकार ने जीडीपी के आंकड़ों पर सफाई दे दी है। सरकार का कहना है कि उसके जीडीपी के आंकड़े सही हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर जारी किए गए हैं। इसमें बिजली की खपत, टू-व्हीलर और कमर्शियल वाहनों की बिक्री शामिल हैं। वैसे सुब्रमणियन के दावों की जांच प्रधानमंत्री इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल करेगा।


इससे पहले RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी 7 फीसदी ग्रोथ के आंकड़े पर संदेह जता चुके हैं। जीडीपी के आंकड़े सही हैं या गलत इसकी जांच हो सकती है। लेकिन सवाल ये है कि जब अरविंद सुब्रमणियन सरकार का हिस्सा थे तो उस वक्त उन्होंने ग्रोथ पर सवाल क्यों नहीं खड़े किए? सरकारी पद से हटने के बाद अचानक ग्रोथ के आंकड़ों में गड़बड़ी क्यों नजर आने लगी है? क्या सरकार कोई ऐसा तरीका निकाल सकती है जिससे बार-बार सवाल उठने बंद हों और हमें पता चल सके कि आखिर हमारी तरक्की की रफ्तार क्या है?