आवाज़ अड्डा: कश्मीर के मोर्चे पर फंस गई है मोदी सरकार! -
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आवाज़ अड्डा: कश्मीर के मोर्चे पर फंस गई है मोदी सरकार!

प्रकाशित Mon, 12, 2018 पर 20:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जम्मू-कश्मीर में 3 दिन के भीतर 2 बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं। दिसंबर से ही नियंत्रण रेखा पर सीजफायर उल्लंघन और फायरिंग के चलते सीमा से लगे इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। कभी वहां के बड़े राजनीतिक नेता अलगाववादी बयान देते हैं तो कभी विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं। कुल मिलाकर ऐसा लगता है कि कश्मीर में समस्या सुलझने के बजाय और गहरी होती जा रही है और अब सबसे ज्यादा सवाल कश्मीर में मोदी सरकार की कामयाबी को लेकर उठ रहे हैं।


शनिवार सुबह जम्मू के सुंजवान में आर्मी कैंप पर हमला। 5 जवानों की शहादत और 3 आतंकवादियों को मार गिराने के बाद भी ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ कि श्रीनगर के सीआरपीएफ कैंप पर हमला हो गया। दिसंबर में नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी से शुरू हुआ ये सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। नए साल में यानि पिछले सवा महीनों के भीतर 10 आतंकवादी हमले हो चुके हैं। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी के चलते सीमा से लगे इलाकों में खौफ का माहौल है और केंद्र सरकार फिर ये कह रही है कि देश के स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कड़ा जवाब दिया जाएगा।


लेकिन विपक्ष कह रहा है कि सरकार बयान से काम चला रही है और जम्मू-कश्मीर में समस्या हल होने की बजाए बढ़ती जा रही है। सत्ता से बाहर रहते हुए पाकिस्तान का राग अलापते रहे जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला अब कह रहे हैं कि पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ और आतंकवादी हमले रुकने वाले होते तो रुक गए होते, अब तो सरकार को सोचना है कि ऐसे में क्या कदम उठाने चाहिए।


रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन आज जम्मू में थीं। सुंजवान आर्मी कैंप पर हमले में लोकल लोगों के शामिल होने की आशंका जताई। पाकिस्तान की कायराना हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही।


इधर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर कश्मीर समस्या पर पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि पीडीपी ने बीजेपी के साथ इसलिए समझौता किया था कि कश्मीर समस्या का कोई हल निकाला जाएगा। लेकिन अब तो पाकिस्तान के साथ बातचीत की बात को देशद्रोह बता दिया जाता है।


भारत सरकार कह चुकी है कि पाकिस्तान के साथ तभी बातचीत की जाएगी जब सीमा पार से  घुसपैठ और आतंकवाद बंद होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जम्मू-कश्मीर में अमन चैन और समस्या के स्थायी समाधान पर आखिर मोदी सरकार क्या सोचती है? और क्या कश्मीर के हालत से निपटने में अब तक वो नाकाम रही है?