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आवाज़ अड्डा: जीत का पक्का भरोसा, मोदी-शाह की जोड़ी फिर करेगी कमाल!

प्रकाशित Tue, 11, 2018 पर 08:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर, रुपये का भाव पाताल में। जाहिर है पब्लिक हैरान परेशान और नाराज है। यही देखकर विपक्षी पार्टियां पूरे जोश में हैं कि अब वो सब साथ मिलकर सरकार को जमीन पर ला पटकेंगी। लेकिन फैसला तो 2019 में ही होगा। उसके लिए बीजेपी भी तैयारी में पीछे नहीं है। उसे अपनी जीत का पूरा भरोसा है। उल्टे प्रधानमंत्री विपक्षी एकता की कोशिशों पर कटाक्ष कर रहे हैं। लेकिन सड़क का हाल देखकर बीजेपी की राह भी आसान तो नहीं लगती। इसीलिए सवाल ये है कि क्या बीजेपी 2019 में अपनी जीत को लेकर ओवर कॉन्फिडेंट है?


भारतीय जनता पार्टी अगले 50 साल तक जीत का भरोसा जता रही है। बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में ये बात पूरे विश्वास के साथ अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के सदस्यों के सामने कही। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करेगी। उन्होंने 2019 के लिए अजेय भारत, अटल बीजेपी का नारा दिया। पीएम ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो सत्ता में फेल रहे वो विपक्ष में भी फेल हैं। कांग्रेस रोज नया झूठ बोलती है। मोदी ने कहा कि 2019 में एक परिवार के 48 साल और उनकी सरकार के 48 महीनों के कामकाज पर चर्चा होगी। विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन की कोशिशों पर उन्होंने कहा कि जो लोग आंख से आंख नहीं मिलाते हैं वो महागठबंधन की सोच रहे हैं।


लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी जो आत्मविश्वास दिखा रही है वो कितना मजबूत है? ये दावे ऐसे वक्त में किए जा रहे हैं जब विपक्ष कई मोर्चों पर सरकार की घेराबंदी कर रहा है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, रुपये में गिरावट, महंगाई, अनुसूचित जाति के लोगों की नाराजगी, एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों का विरोध और किसानों की बदहाली - ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है। कई मुद्दों पर सहमति नहीं होने के बावजूद कई मौकों पर गैर-बीजेपी दल एक मंच पर दिखे हैं। ऐसे में इन्हें भरोसा है कि 2019 में बीजेपी का वो मिलकर मुंह तोड़ जवाब देंगे।


बीजेपी 2019 ही नहीं अगले 50 साल तक राज करने की बात कर रही है। क्या ये उसका ओवर कॉन्फिडेंस है। या ये भरोसा उसे अपने काम से ज्यादा मोदी-शाह की जोड़ी से मिल रहा है। विपक्ष को चुप कराने के लिए बीजेपी इन मुद्दों को जिस तरह खारिज कर रही है क्या वो उसे भारी नहीं पड़ेंगे? क्या एक अच्छी टक्कर देने के लिए अगले चंद महीनों में विपक्ष का महागठबंधन हकीकत बन पाएगा?