आवाज़ अड्डा: विपक्षी गठबंधन का दम, मोदी को हराने का महाप्लान -
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आवाज़ अड्डा: विपक्षी गठबंधन का दम, मोदी को हराने का महाप्लान

प्रकाशित Tue, 12, 2018 पर 06:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी-शाह के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्षी पार्टियां अब अपना पूरा जोर लगा देना चाहती हैं। हर रोज इस मोर्चे पर कुछ नया सुनने को मिलता है। हालांकि ये पार्टियां मोदी हटाओ का नारा तो लगा रही हैं लेकिन मोदी के सामने प्रधानमंत्री पद का चेहरा कौन होगा इस पर आम राय नहीं है। हालांकि 2019 में मोदी को हराने के लिए बड़ी पार्टियां कुछ सीटें कुर्बान करने को भी तैयार हैं। शायद विपक्ष ये बात समझ गया है कि मोदी के रथ को रोकना अकेले किसी पार्टी के बस की बात नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ मोदी हटाओ के नारे पर विपक्षी गठबंधन जीत पाएगा?


लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी की करारी हार के बाद विपक्षी एकता जोर पकड़ने लगी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में विपक्षी गठबंधन का फॉर्मूला सफल रहा है। विपक्ष को लगने लगा है कि एकजुट होकर ही मोदी के विजय रथ को रोका जा सकता है। इसलिए सीटों के बंटवारे की चिंता किए बिना अखिलेश यादव ने 2019 के लिए मायावती के साथ गठबंधन जारी रखने का एलान कर दिया है। यूपी में वो जूनियर पार्टनर बनने को तैयार हैं।


कांग्रेस भी गठबंधन की अहमियत समझ रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कह दिया है कि कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा चुनावों में गठबंधन के लिए तैयार है और इसके लिए सीटों का बंटवारा रुकावट नहीं बनेगा। महागठबंधन पर बीजेपी जो हमले कर रही है उसमें सबसे बड़ा हथियार ये है कि गठबंधन का नेता कौन होगा। इसकी काट में कुछ खुले में, कुछ दबे छिपे बीएसपी नेता मायावती का नाम आगे करने की कोशिश कर रहे हैं।


लेकिन दिग्गजों से भरे इस गठबंधन का नेतृत्व इतनी आसानी से किसी को मिल जाएगा वो मुमकिन नहीं दिखता। बीजेपी की दिक्कत ये है कि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी, एनडीए से नाता तोड़ चुकी है और सहयोगी होते हुए भी शिवसेना बीजेपी के लिए परेशानी बनी हुई है। ऐसे में अगर चुनाव तक गैर-बीजेपी दलों का महागठबंधन बन गया तो मोदी की मुश्किलें बढ़ेंगी। सवाल ये है कि महागठबंधन मोदी को सिर्फ जातीय अंकगणित के हिसाब से चुनौती देगा या मोदी हटाओ के नारे के अलावा भी उसके पास कोई वैकल्पिक और भरोसेमंद एजेंडा होगा।