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आवाज़ अड्डा: कांग्रेस के भविष्य पर उठ रहे सवाल, क्या कांग्रेस-NCP मर्जर से बनेगी बात!

लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस बुरी तरह टूट गई है और बिखरने लगी है।
अपडेटेड Oct 10, 2019 पर 12:38  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कांग्रेस में आखिर चल क्या रहा है? ये सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है। लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस बुरी तरह टूट गई है और बिखरने लगी है। कांग्रेस के नेता बगावत पर उतर आए हैं। पुराने नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद भी पार्टी के नेता कंट्रोल से बाहर हो रहे हैं।


सलमान खुर्शीद की तरह कांग्रेस के कुछ नेता पार्टी की कमियों की तरफ इशारा करते हैं। खुर्शीद ने राहुल गांधी का अध्यक्ष पद छोड़ कर चले जाना कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बताया है। उधर महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बीच सुशील कुमार शिंदे ने कांग्रेस-NCP के विलय की बात छेड़कर नई चर्चा छेड़ दी है। ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस का मनोबल टूट रहा है और वो दिशाविहीन हो रही है।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद पार्टी की बुरी हालत पर मंथन करने की बात कह रहे हैं। अपनी ही पार्टी की आलोचना करते हुए उन्होंने कई सवाल उठाए हैं। खुर्शीद का कहना है कि कांग्रेस संघर्ष के दौर से गुजर रही है। दो राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीतने की संभावना नहीं है। चुनाव में जीतना तो दूर की बात है, कांग्रेस अपना भविष्य तक तय नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पार्टी को देश के बदलते हुए मिजाज को समझना होगा। खुर्शीद ने राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़कर जाने को कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बताया। खुर्शीद के बयान पर बीजेपी कांग्रेस पर तंज कस रही है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि अब कांग्रेस का कोई वजूद नहीं रह गया है।


इधर महाराष्ट्र में कांग्रेस और NCP गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच एक चुनावी सभा में कांग्रेस के नेता सुशील कुमार शिंदे ने कांग्रेस और NCP के विलय की बात छेड़ दी। लेकिन शरद पवार ने विलय की इस हवा को ज्यादा देर तक टिकने नहीं दिया। उन्होंने तुरंत शिंदे को जवाब दे दिया है।


कांग्रेस के अंदर कंफ्यूजन की स्थिति दिख रही है। सवाल ये है कि कांग्रेस के नेता जो बयान दे रहे हैं उसमें कोई दम है? विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस-NCP के विलय की बात क्यों हवा दी जा रही है? क्या इससे दोनों पार्टियों को फायदा होगा? सवाल ये भी है कि क्या अब कांग्रेस में बड़े बदलाव की जरूरत है? राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कांग्रेस के नेता फुल टाइम अध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं करते? क्या कांग्रेस में काबिल नेताओं की कमी है जो अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकें? और सलमान खुर्शीद जो सवाल उठा रहे हैं क्या उस पर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गंभीरता से विचार करेगा?