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आवाज़ अड्डाः राफेल पर कांग्रेस का वार, कितना होगा असरदार!

प्रकाशित Thu, 14, 2019 पर 08:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राफेल डील पर घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले अखबार में छपी रिपोर्ट, और अब संसद में सीएजी की रिपोर्ट ने राफेल के मुद्दे को और गरमा दिया है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में राफेल की असल कीमत का खुलासा तो नहीं किया है, लेकिन यूपीए सरकार के मुकाबले मोदी सरकार की डील को 2.86 फीसदी सस्ता बताया है। कांग्रेस को ये बात हजम नहीं हो रही है। राहुल गांधी राफेल डील को महंगा बता रहे हैं। साथ ही जेपीसी की मांग भी दोहरा रहे हैं। चुनाव से पहले सीएजी की रिपोर्ट सरकार के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सीएजी की रिपोर्ट के बाद भी राफेल चुनाव में बड़ा मुद्दा बना रहेगा?


संसद में सीएजी की रिपोर्ट ने सरकार और विपक्ष के बीच राफेल पर रार और बढ़ा दी है। राफेल की कीमत को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर लगातार हमले करती रही है। लेकिन सीएजी की रिपोर्ट में विमान की असल कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। सीएजी के मुताबिक राफेल पर यूपीए सरकार के मुकाबले मोदी सरकार की डील 2.86 फीसदी सस्ती हुई। 126 विमानों के मुकाबले 36 विमानों की डील में 17.08 फीसदी रकम की बचत हुई है। फ्लाई अवे प्राइस यानि तैयार विमान का दाम यूपीए सरकार की डील के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक राफेल विमानों की पहले 72 महीने में डिलीवरी होनी थी, लेकिन अब 71 महीने में डिलीवरी होगी। शुरुआती 18 विमान पिछली डील के मुकाबले 5 महीने पहले मिलेंगे।


राफेल पर कांग्रेस के हमलों से घिरी सरकार के लिए सीएजी की रिपोर्ट वरदान बनकर आई है। सीएजी की रिपोर्ट के बाद सरकार को कांग्रेस के ऊपर हमला करने का मौका भी मिल गया है। कांग्रेस राफेल के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। वो राफेल पर जेपीसी की मांग को दोहरा रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर हमला करते हुए कहा है कि डील महंगी है और डिलीवरी भी लेट है।


राफेल के मामले पर सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग को ठुकरा चुका है। सवाल ये है कि क्या सीएजी की रिपोर्ट से सरकार को राफेल पर क्लीन चिट मिल गई है? और क्या इसकी कीमत को लेकर विवाद खत्म हो जाएगा? सवाल ये भी है कि कांग्रेस जो आरोप लगा रही है उसमें कोई दम भी है क्या? या फिर वो इस मुद्दे को लेकर सिर्फ राजनीति कर रही है? कांग्रेस राफेल के मुद्दे को मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के बड़े हथियार के रूप में देख रही है। लेकिन क्या सीएजी की रिपोर्ट के बाद भी राफेल चुनाव में बड़ा मुद्दा बना रहेगा?