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आवाज़ अड्डाः राहुल-नायडू की दोस्ती, दे पायेगी मोदी को टक्कर!

प्रकाशित Sat, 03, 2018 पर 13:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

2019 से पहले विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम के केंद्र में अब आंध्र प्रदेश के धुरंधर चंद्रबाबू नायडू दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से हाथ मिला लिया है और कहा है कि बीजेपी के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टियों को एकसाथ लाएंगे। पिछले एक सप्ताह में नायडू ने विपक्ष के करीब दर्जन भर नेताओं से मुलाकात की है। तो क्या अब विपक्षी महागठबंधन की डूबती-उतराती नैया को नायडू के रूप में एक खेवैया मिल गया है।


राहुल गांधी और नायडू का हाथ मिलाना साफ तौर पर आंध्र और तेलंगाना में कांग्रेस और टीडीपी का गठबंधन माना जा सकता है। लेकिन सप्ताह भर में दो बार दिल्ली का दौरा कर चुके नायडू की राजनीतिक मुलाकातों पर नजर डालिए - शरद पवार, फारूख अब्दुला, मुलायम सिंह यादव, सीताराम येचुरी, अखिलेश यादव, मायावती, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल। इसके अलावा ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव से भी वो फोन पर बात कर चुके हैं, डीएमके और दूसरी पार्टियों से भी बात करेंगे। और अब ये कह रहे हैं कि कांग्रेस से हाथ मिलाना तो एक शुरूआत है। असली मकसद बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाना है।


लेकिन ऐसे महागठबंधन पर सबसे पहले सवाल ये उठता है कि चेहरा कौन होगा। फराहुल गांधी ने भी साफ किया है कि अभी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कोई चर्चा नहीं होगी। राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाते रहे मुलायम सिंह यादव भी चंद्रबाबू नायडू की पहल को एक गंभीर प्रयास मानते हैं।


लेकिन बीजेपी कह रही है कि ये फोटो सेशन का गठबंधन है और चुनाव में ये तमाम दल बिखरे हुए दिखाई देंगे। ये सही है कि बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद चंद्रबाबू नायडू को आंध्र और तेलंगाना में कांग्रेस जैसा साथी चाहिए था। ये भी हो सकता है कि नीतीश के एनडीए में शामिल होने के बाद चंद्रबाबू को राष्ट्रीय राजनीति में एक खाली जगह दिखाई दे रही हो। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिस महागठबंधन और कॉमन प्रोग्राम का सपना वो दिखा रहे हैं - क्यो वो हकीकत बन पाएगा? और अगर ये हो भी गया तो वो 2019 में बीजेपी को कितनी गंभीर चुनौती दे पाएगा?