आवाज़ अड्डा: बच्चियों के रक्षक बने भक्षक -
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आवाज़ अड्डा: बच्चियों के रक्षक बने भक्षक

प्रकाशित Thu, 09, 2018 पर 07:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

संरक्षण गृह का अर्थ क्या है, एक ऐसी जगह जहां आप सुरक्षित हों। समाज कल्याण विभाग का काम है देश भर में ऐसे गृह या शेल्टर होम चलाना। ये अनाथ बच्चों के लिए भी होते हैं और बेसहारा लड़कियों या महिलाओं के लिए भी। लेकिन फिल्मों में देखिए या साहित्य में, जब भी ऐसे होम्स का जिक्र आता है तो यूं ही आता है जैसे वहां संरक्षण नहीं शोषण ही होता है। और जब अपने आसपास के किसी होम की पोल खुलती है तो पता चलता है कि सच्चाई कुछ ऐसी ही है।


बिहार का मुजफ्फरपुर हो या उत्तर प्रदेश में देवरिया और हरदोई एक के बाद एक किस्से खुल रहे हैं और सिर्फ अपराधियों पर नहीं, व्यवस्था पर नहीं, पूरे समाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपियों की सत्ता पक्ष के साथ नजदीकियों की बात सामने आ रही हैं। सवाल ये खड़ा होता है कि इन मामलों में सरकार और आरोपियों की मिलीभगत ही वो वजह थी कि ये मामले कभी पकड़ में नहीं आए? या इसका जवाब हमें खुद के भीतर भी तलाशना चाहिए।


बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप कांड में राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। मुजफ्फरपुर रेप कांड में मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर का नाम आने के बाद विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।


हाल ही में जांच एजेंसियों ने खुलासा किया था कि ब्रजेश ठाकुर और मंजू वर्मा के पति के बीच पिछले पांच महीने में 17 बार बात हुई। हालांकि इस मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर का कहना है कि उसका मंजू वर्मा के पति से कोई संबंध नहीं है। इस रेप कांड की वजह से लोगों में भी गुस्सा नजर आ रहा है। कोर्ट में पेशी के वक्त ब्रजेश ठाकुर पर एक महिला ने स्याही फेंक दी। इस रेप कांड को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार नीतीश सरकार पर हमला बोल रहे हैं।


वहीं देवरिया के बाल गृह में कथित यौन शोषण के मामले में सीबीआई जांच की मॉनिटरिंग इलाहाबाद हाईकोर्ट करेगा। कोर्ट ने सीबीआई से 13 अगस्त तक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि सेक्स रैकेट के पीछे कोई राजनेता या वीआईपी तो नहीं है। और जब संस्था ब्लैक लिस्टेड थी तो पुलिस संस्था में लड़कियां क्यों पहुंचाती थी। इस मामले में लापता लड़कियों की जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। पुलिस ने दे​वरिया कांड की मुख्य आरोपी और एनजीओ संचालिका गिरिजा त्रिपाठी के गोरखपुर में चल रहे अवैध वृद्ध आश्रम से एक लापता लड़की बरामद कर ली है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस मामले में आरोपियों और सरकार की सांठगांठ के आरोप लगा रहे हैं।


मुजफ्फरपुर और देवरिया कांड की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई है। पिछले हफ्ते विपक्षी पार्टियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। संसद में मुद्दा उठा तो गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इन मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


मुजफ्फरपुर कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट सरकार से जो सवाल पूछ रहा है वो सवाल आम लोगों के मन में भी हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर इन बाल गृहों की जांच क्यों नहीं की गई। और बाल गृह चलाने वाले एनजीओ को राज्य सरकार की तरफ से फंडिंग क्यों जारी रही? दोनों मामलों के आरोपियों के रसूखदार होने और उनकी सत्ता पक्ष के साथ नजदीकी की बात सामने आ रही है। सवाल ये है कि ऐसे बाल गृह जहां बच्चियों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं होता है, क्या वहां सरकार को निगरानी नहीं रखनी चाहिए? बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा देन में इतनी देरी क्यों की?