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आवाज़ अड्डाः श्री श्री रविशंकर के बयान पर बवाल, सुलझेगा अयोध्या विवाद!

प्रकाशित Wed, 07, 2018 पर 09:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अयोध्या विवाद का बातचीत से समाधान ढूंढने में जुटे आर्ट ऑफ लिविंग के मुखिया श्री श्री रविशंकर ने अदालत के रास्ते समाधान को खतरनाक विकल्प बता दिया है। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े इस मसले पर कोर्ट के फैसले से मुस्लिम युवक उग्रवाद की तरफ जा सकते हैं, इससे आज नहीं तो कल देश में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा होगी और सीरिया जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं। श्री श्री के इस बयान को कई लोगों ने एक तरह की खुली धमकी बताया तो कुछ ने नफरत फैलाने की कोशिश।


श्रीश्री रविशंकर मानते हैं कि राम मंदिर आस्था का प्रश्न है, इसलिए कोर्ट का फैसला जिस भी समुदाय के खिलाफ जाएगा, उसमें रोष पैदा होगा। उनके मुताबिक मुस्लिम युवक इसके चलते उग्रवाद की तरफ बढ़ सकते हैं। और इस फैसले की वजह से आज नहीं तो कल देश में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। अपनी बात को बल देने के लिए उन्होंने कहा कि सीरिया समेत मध्य पूर्व देशों के हालात उन्होंने देखे हैं, कश्मीर की समस्या सबके सामने है, देश को ऐसी एक और समस्या नहीं चाहिए, ऐसे हालात नहीं चाहिए। इसलिए अच्छा होगा कि मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दे और वहां से अलग हटकर मस्जिद के लिए जमीन ले ले। मुस्लिम संगठन रविशंकर के इस बयान को खुली धमकी बता रहे हैं, लेकिन रविशंकर का कहना है कि वो धमकी नहीं दे रहे हैं बल्कि शांति का रास्ता दिखा रहे हैं।


लेकिन एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने रविशंकर पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि रविशंकर धमकी की भाषा बोल रहे हैं और उन्होंने कोर्ट की अवमानना की है। इतना ही नहीं, ओवैसी लोकसभा चुनावों तक अयोध्या विवाद की सुनवाई टालने की मांग भी कर रहे हैं।


अयोध्या विवाद में श्रीश्री की मध्यस्थता पर शुरू से सवाल खड़े कर रहे बीजेपी नेता रामविलास वेदांती ने कहा है रविशंकर कांग्रेस के इशारे पर मामले को उलझाने की साजिश कर रहे हैं। राम मंदिर से उनका कोई ताल्लुक नहीं और प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ 2019 के पहले मंदिर निर्माण शुरू करवा देंगे।


अयोध्या विवाद में रविशंकर की मध्यस्थता पर सवाल उठाए जा सकते हैं लेकिन क्या रविशंकर कि आशंकाएं भी निराधार हैं? मुस्लिम पक्ष तो हर हाल में कोर्ट का फैसला मानने को तैयार है, लेकिन क्या हिंदू पक्ष भी अपने खिलाफ किसी फैसले को मानेंगे? अगर नहीं तो फिर आखिर इस समस्या का समाधान क्या है?