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आवाज़ अड्डाः फिर मोदी सरकार, विपक्षी पार्टियों से कहां हुई चूक!

प्रकाशित Tue, 21, 2019 पर 09:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अब से साठ घंटे बाद ईवीएम मशीनें खुलेंगी और बताना शुरू करेंगी कि देश भर के वोटरों ने क्या फैसला किया है, किसको कितनी सीटें मिलेंगी। कौन बनेगा प्रधानमंत्री और किस किसके अरमानों पर पानी फिरेगा। ये पूरा फैसला सामने आने में उसके बाद भी कई घंटे लगेंगे। लेकिन जब तक वो नहीं होता तब तक देश भर में बहस इसी बात पर होनी है कि एक्जिट पोल जो तस्वीर दिखा रहे हैं वो क्या कहती है। सिर्फ सीटों की गिनती देखें तो एग्जिट पोल के नतीजे 2014 के चुनाव नतीजों से बहुत अलग नहीं है। सभी एग्जिट पोल एक स्वर में NDA को प्रचंड बहुमत दे रहे हैं। लेकिन जहां फर्क दिख रहा है वो है वोट शेयर।


सर्वे के मुताबिक बीजेपी और NDA के वोट शेयर में खासी बढ़त की संभावना दिख रही है। मोदी हटाओ का नारा लेकर मैदान में उतरीं विपक्षी पार्टियों के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं है। विपक्षी दलों ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर तो सवाल उठाए ही हैं। ऐसा भी दिख रहा है कि अगर एग्जिट पोल नतीजों में तब्दील होते हैं तो ईवीएम को कसूरवार ठहराने की भी तैयारी है। लेकिन सवाल ये है कि विपक्षी पार्टियों की हार का विलेन कौन है? और क्या विपक्षी एकता के फ्लॉप होने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है?


लोकसभा चुनाव के बाद एग्जिट पोल में भी हर तरफ मोदी-मोदी ही दिख रहा है। कोई भी एग्जिट पोल उठा के देख लें, NDA को अबकी बार 300 के पार सीटें मिलने का अनुमान है। न्यूज18-IPSOS के एग्जिट पोल में NDA को 336 सीटें मिल रही हैं जबकि यूपीए के 82 सीटों पर सिमटने का अनुमान है। जहां एक तरफ बीजेपी के खेमे में खुशी की लहर है। वहीं विपक्षी पार्टियां एग्जिट पोल पर ही सवाल उठा रही हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि वो एग्जिट पोल की गपशप पर विश्वास नहीं करती हैं। कांग्रेस एग्जिट पोल का पुराना इतिहास बता रही है। साथ ही इनके मैनेज्ड होने का आरोप भी लगा रही है।


विपक्षी पार्टियां चुनाव तो एक होकर नहीं लड़ पाईं, लेकिन ईवीएम के मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एकजुट हैं। चुनाव के दौरान 50 फीसदी ईवीएम की VVPAT से मिलान कराने की मांग हुई। और अब एग्जिट पोल के साथ-साथ ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर अभी से सवाल खड़े किए जा रहे हैं।


उधर एग्जिट पोल के नतीजों का चंद्रबाबू नायडू के मिशन पर कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। वो चुनाव के नतीजों से पहले विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में लगे हैं। राहुल गांधी, मायावती, अखिलेश यादव, शरद पवार, ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं से उनकी मुलाकात हो चुकी है। वो चुनाव में अपनी जीत का भरोसा तो जता रहे हैं लेकिन ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका भी जता रहे हैं।


एग्जिट पोल के नतीजों से गदगद बीजेपी विपक्षी पार्टियों के आरोपों को खास तवज्जो नहीं दे रही है। एग्जिट पोल के नतीजे विपक्ष के लिए खतने की घंटी है। अगर वो अब भी कसूर ईवीएम पर निकालने की जिद किए बैठे हैं तो फिर ये हकीकत से मुंह चुराने जैसा है। संजीदा सवाल ये है कि अगर एग्जिट पोल में क्षेत्रीय पार्टियां अपना गढ़ बचाने में कामयाब होती दिख रही हैं तो क्या फिर कांग्रेस विपक्ष की खराब परफॉरमेंस के लिए जिम्मेदार नहीं है? विपक्षी एकता पहले से ही आधी अधूरी थी, फिर उनके नेता अप्रत्याशित परिणाम की उम्मीद लगाए क्यों बैठे हैं? अगर बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता है तो क्या विपक्षी गठबंधन का भविष्य खतरे में पड़ेगा? और एक बार फिर सभी दल अपने अपने रास्ते निकल जाएंगे?