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NRC से क्या हुआ हासिल, असम में बनी या बिगड़ गई बात!

असम में घुसपैठियों की पहचान के लिए बनाया गया NRC अपनी अंतिम लिस्ट के साथ ही विवादों में आ गया है।
अपडेटेड Sep 05, 2019 पर 13:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

असम में घुसपैठियों की पहचान के लिए बनाया गया NRC अपनी अंतिम लिस्ट के साथ ही विवादों में आ गया है, NRC ड्राफ्ट के मुताबिक करीब 40 लाख लोग घुसपैठिये थे लकिन अब 19 लाख ही बचे हैं, चुनावी मुद्दा बनाने वाली बीजेपी खुद इसका विरोध कर रही है और अदालत में जाने की तैयारी में है। दरअसल बीजेपी की उम्मीद के मुताबिक घुसपैठियों की संख्या नहीं होने से उसकी किरकिरी हो रही है, इसके साथ ही ये मुद्दा हिंदू मुसलमान का भी एंगल ले रहा है क्योंकि खबरों के मुताबिक लिस्ट में शामिल करीब 60 फीसदी यानी 13 लाख लोग हिंदू हैं और बात यहीं से बिगड़ती दिख रही है। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने NRC का समर्थन करते हुए घुसपैठियों के मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। लेकिन अब उसके सुर बदल रहे हैं। असम में बीजेपी सरकार इसका विरोध कर रही है। अखिल भारती विद्यार्थी परिषद यानि ABVP NRC के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी में है। हालांकि बीजेपी कह रही है कि सरकार NRC में खामियों को दूर करने का प्रयास करेगी। कहा ये भी जा रहा है कि संसद के विंटर सेशन में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल लाने की तैयारी है।


NRC लिस्ट को लेकर सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच वाद विवाद हो गया है। AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और असम के वित्त मंत्री के बीच ट्विटर वॉर छिड़ गया। ओवैसी ने हेमंत बिस्वा शर्मा का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि ये खुली स्वीकारोक्ति है कि किस तरह असम एनआरसी का इस्तेमाल मुस्लिमों को बाहर करने के लिए किया गया। पहले इस जटिल प्रक्रिया में बगैर दस्तावेजी सबूतों के लोगों को शामिल करने के बाद अब हेमंत बिस्वा शर्मा कह रहे हैं कि किसी भी कीमत पर हिंदुओं की रक्षा की जाएगी। ओवैसी के ट्वीट पर पलटवार करते हुए शर्मा ने लिखा कि अगर भारत हिंदुओं की रक्षा नहीं करेगा तो कौन करेगा? पाकिस्तान? भारत हमेशा सताए हुए हिंदुओं का घर रहेगा, भले ही आप इसके विरोधी हों।


मौजूदा NRC में ऐसे कई लोग हैं जो यहां के असल नागरिक हैं, दस्तावेज भी पूरे हैं लेकिन उनके नाम लिस्ट में नहीं हैं। हालांकि जिन लोगों के नाम लिस्ट में शामिल नहीं हैं उन्हें तय समय सीमा के अंदर विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी। कांग्रेस NRC की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। वहीं बीजेपी के नेता असम की तर्ज पर दूसरे राज्यों में भी NRC कराने की मांग करते रहे हैं। लेकिन विपक्षी पार्टियां इस पर कड़ा विरोध जता रही हैं।


NRC के बाद अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार एक बार फिर से संसद के शीतकालीन सत्र में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल ला सकती है। इसके पास होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई रिफ्यूजी लोगों को भारत की नागरिकता मिल पाएगी। सवाल ये है कि क्या NRC से असम में घुसपैठियों की पहचान का लक्ष्य पूरा हो पाया है? क्या NRC के परिणाम उम्मीद के एकदम उलट आए हैं? क्या इसने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं? और जो लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे, क्या उन्हें देश के बाहर कर दिया जाएगा और कहां? इन्हीं सवालों पर हो रही है ये बड़ी चर्चा।



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