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आवाज़ अड्डाः चुनाव के बाद किसकी बनेगी सरकार!

प्रकाशित Fri, 10, 2019 पर 08:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन बनाने की कोशिश तो फेल हो गई। हालांकि कुछ राज्यों में विपक्षी पार्टियों का गठबंधन हुआ। लेकिन ज्यादातर राज्यों में विपक्ष अलग-अलग ही लड़ा। अब चुनाव के नतीजे आने से पहले विपक्षी पार्टियों में तालमेल या साथ आने की कोशिशें फिर तेज होती दिख रही हैं। हिसाब लगाया जा रहा है  कि अगर बीजेपी को बहुमत नहीं मिला तो केंद्र में सरकार कैसे बनाई जाए। मुलाकातें भी दो तरह की हो रही हैं। एक विपक्षी महागठबंधन के लिए और दूसरी गैर-कांग्रेस/ गैर-बीजेपी सरकार बनाने के लिए। दोनों की अगुवाई दक्षिण के ही नेता कर रहे हैं। सवाल ये है कि क्या चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष के सरकार बनाने का कोई चांस दिख रहा है। और क्या सरकार बनाने के लिए विपक्षी पार्टियां एक हो पाएंगी?


लोकसभा चुनाव अभी चल रहे हैं। मतदान के दो चरण बाकी हैं। लेकिन नतीजों से पहले केंद्र में सरकार बनाने के लिए विपक्षी पार्टियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टियों को एक करने का बीड़ा उठाया है। उनकी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात हो गई है। वो ममता बनर्जी के भी संपर्क में हैं। विपक्षी पार्टियां 21 मई को बैठक भी कर सकती हैं जिसमें नतीजों के बाद की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। नायडू कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला सभी विपक्षी दल मिलकर करेंगे।


कांग्रेस को भरोसा है कि चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिल पाएगा। इसलिए वो गैर-बीजेपी सरकार बनाने की कोशिश करेगी। वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश शुरू हो गई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन से मुलाकात की। इसके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी से भी बातचीत की। हालांकि जेडीएस का कांग्रेस के साथ गठबंधन है। आम आदमी पार्टी भी शर्त के साथ कांग्रेस को समर्थन देने की बात कह रही है।


लेकिन विपक्ष की सरकार बनाने की तैयारी को लेकर बीजेपी चिंतित नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कह रहे हैं कि विपक्ष हार की तैयारी कर रहा है। लोकसभा चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा ये 23 मई को पता चलेगा। लेकिन सवाल ये है कि नतीजों के बाद क्या विपक्षी पार्टियां एकजुट हो पाएंगी? अगर केंद्र में सरकार ही बनानी है तो फिर विपक्षी पार्टियां अलग-अलग कोशिश क्यों कर रही हैं? क्या गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस सरकार बनने की कोई संभावना दिख रही है? क्या ये भी मुमकिन है कि केसीआर की थर्ड फ्रंट बनाने की पहल रिजल्ट के बाद विपक्षी एकता में दरार डालने का ही काम नहीं करेगी? सबसे बड़ा सवाल ये है कि विपक्षी दलों को जो काम चुनाव से पहले करना था उसकी कोशिश अब क्यों की जा रही है? और शायद चुनाव नतीजों के बाद इसकी जरूरत ही ना पड़े।