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आवाज़ अड्डाः लोकसभा चुनाव में किसका चलेगा सिक्का!

प्रकाशित Wed, 13, 2019 पर 08:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सियासी घमासान भी बढ़ता जा रहा है। जैसे को तैसा वाली राजनीति जोर पकड़ रही है। ममता ने पश्चिम बंगाल में अमित शाह और योगी का हेलीकॉप्टर उतरने से रोका तो योगी ने अखिलेश यादव को लखनऊ एयरपोर्ट के बाहर प्रयागराज जाने से रोक दिया। इस पर बवाल होना तय था। विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी सरकार पर हमला बोल दिया। विपक्षी पार्टियों की एकता के ऐसे कई वाकये सामने आ चुके हैं। लेकिन जब गठबंधन करके चुनाव लड़ने की बात होती है तो कई पार्टियों के सुर अलग हो जाते हैं। जिस तरह विपक्षी एकता दिख रही है, उसमें आने वाला चुनाव क्या मोदी बनाम ऑल हो जाएगा। सवाल ये है कि विपक्षी एकता की कोशिशों के बावजूद क्या बीजेपी को हरा पाना मुश्किल है?


विपक्षी एकता की ऐसी तस्वीरें पिछले कुछ महीनों में कई बार देखी जा चुकी हैं। केंद्र के स्तर पर गैर-बीजेपी दलों का महागठबंधन भले ही ना बन पाया हो। लेकिन विपक्षी पार्टियां राज्य स्तर पर गठबंधन कर रही हैं। बीच-बीच में कुछ ऐसी घटनाएं भी घट रही हैं जहां विपक्षी पार्टियों को अपनी एकता दिखाने का मौका मिल रहा है। पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का सीबीआई और केंद्र सरकार के खिलाफ धरना। और अब यूपी में अखिलेश यादव को एयरपोर्ट के बाहर ही प्रयागराज जाने से रोकने पर बवाल हो गया है। अखिलेश इसे योगी सरकार के इशारे पर हुई हरकत बता रहे हैं।


कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां भी अखिलेश के समर्थन में आ गई हैं। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है। गैर-बीजेपी दल बीजेपी के खिलाफ हमला तेज कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गठबंधन को महामिलावट बताते हैं। उनका कहना है कोई गठबंधन उन्हें झुका नहीं सकता।


बीजेपी ने चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात में जनता को कार्यकर्ताओं से जोड़ने के लिए मेरा परिवार भाजपा परिवार अभियान की शुरुआत कर दी है। वो भी गठबंधन की कोशिशों को बेकार बता रहे हैं।


चुनावी बिसात बिछ चुकी है। आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी तेज हो गया है। कांग्रेस राफेल सौदे को लेकर लगातार मोदी सरकार पर हमले कर रही है। तो बीजेपी ने रॉबर्ट वाड्रा के जरिए गांधी परिवार पर निशाना साध दिया है। सवाल ये है कि चुनाव में क्या विपक्षी एकता मोदी-शाह की जोड़ी पर भारी पड़ेगी? क्या राफेल का मुद्दा बीजेपी का खेल खराब करेगा? सवाल ये भी है कि जब विपक्षी पार्टियों का मकसद बीजेपी को हराना ही है तो वो अलग-अलग होकर क्यों लड़ना चाहती हैं? क्या विपक्ष की एकता सिर्फ एक दिखावा है? और सबसे बड़ा सवाल ये कि विपक्षी एकता की कोशिशों के बावजूद क्या बीजेपी को हरा पाना मुश्किल है?