आवाज़ अड्डाः असम में एनआरसी लिस्ट पर हंगामा क्यों! -
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आवाज़ अड्डाः असम में एनआरसी लिस्ट पर हंगामा क्यों!

प्रकाशित Thu, 02, 2018 पर 08:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानि एनआरसी का मुद्दा गरमाता जा रहा है। संसद में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार बढ़ रही है। एनआरसी के ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं होने पर विपक्ष मोदी सरकार पर लोगों को बांटने का आरोप लगा रहा है । ममता बनर्जी सरकार को गृह युद्ध छिड़ने की चेतावनी दे रही हैं। वहीं कांग्रेस ने सरकार पर राजनीति का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया है। सवाल ये है कि क्या ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के लिए एनआरसी का विरोध कर रही हैं?


असम में जारी हुए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानि एनआरसी के ड्राफ्ट पर राजनीति गरमा गई है। एनआरसी की लिस्ट में 40 लाख लोगों के नाम नदारद हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी का विरोध कर रही हैं। ममता ने आरोप लगाया कि असम में एनआरसी की कवायद राजनीतिक उद्देश्यों से की गई ताकि लोगों को बांटा जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे देश में गृह युद्ध छिड़ जाएगा।


इस मुद्दे की गूंज संसद के दोनों सदनों में सुनाई पड़ी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष से अपील की कि वो इस मामले का राजनीतिकरण ना करे। राजनाथ ने भरोसा दिलाया कि एनआरसी की लिस्ट में जिन लोगों के नाम नहीं हैं, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि राजीव गांधी ने 1985 में असम एकॉर्ड साइन किया था जिसकी आत्मा एनआरसी था। अब कांग्रेस वोट के लिए एनआरसी पर सवाल उठा रही है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा में हंगामा करके लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं ।


वहीं कांग्रेस एनआरसी को लेकर बीजेपी के इरादों पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी राजनीति का ध्रुवीकरण करना चाहती है।


ममता बनर्जी पड़ोसी राज्यों की हितैशी बनकर एनआरसी का मुद्दा जोर शोर से उठा रही हैं। टीएमसी पर हमला बोलते हुए बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में भी अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए इसी तरह का कदम उठाया जाना चाहिए। असम की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 34 फीसदी है। असम में सीमा पार से अवैध तरीके से घुसे लोगों में बड़ा तबका मुसलमानों का माना जाता है जो आज एक बड़ा वोट बैंक भी बन गया है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के लिए एनआरसी का विरोध कर रही हैं?