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आवाज़ अड्डा: योगी सरकार फूल बरसाए, कांवड़िये लट्ठ बजाए

प्रकाशित Fri, 10, 2018 पर 08:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तीन तस्वीरें हैं। तीन किस्से हैं। तीनों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। टीवी चैनलों पर गोल घेरे बनाकर दिखाए जा रहे हैं। तस्वीरों में चेहरे भी साफ हैं, हुड़दंग भी साफ है और वहां चुपचाप खड़े पुलिसवालों की बेबसी भी साफ है। कोई धर्म भक्ति की आड़ में हुड़दंग या गुंडागर्दी करने की इजाजत नहीं देता। लेकिन मुट्ठी भर लोगों की हरकत से पूरा धर्म बदनाम जरूर हो जाता है। और गंभीर सवाल खड़े होते हैं सरकार और प्रशासन पर।


आप समझ ही गए होंगे, बात कांवड़ यात्रा के साथ हुए हुड़दंग की है। जहां एक तरफ पुलिस और प्रशासन कांवड़ियों के स्वागत में हेलिकॉप्टर से फूल बरसा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ कांवड़िये बेरोकटोक सड़क पर लाठी डंडे चलाते नजर आ रहे हैं। तोड़-फोड़ क्यों और कैसे हुई, इससे बड़ा सवाल ये है कि क्या प्रशासन के संरक्षण की वजह से कांवड़ियों के हौसले बढ़ रहे हैं? और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?


पहली घटना दिल्ली के मोती नगर इलाके की है जहां कुछ कांवड़ियों का हुड़दंगी रूप देखने को मिला। बताया जा रहा है कि कार से एक कांवड़िये को धक्का लगने के बाद कांवड़ियों ने कार पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। बाद में कांवड़ियों ने कार को पलट दिया। घटनास्थल पर पुलिस भी पहुंची लेकिन वो हुड़दंगी कांवड़ियों को रोकने में नाकाम रही।


दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की है। यहां के बुकलाना गांव में कांवड़ियों के दो गुटों में झगड़ा हो गया। इसके बाद कांवड़ियों ने जमकर हंगामा किया। हुड़दंगी कांवड़ियों ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए पुलिस को भी नहीं छोड़ा और उनकी ही सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। हालांकि पुलिस इसे आपसी रंजिश का मामला बता रही है।


कांवड़ियों के हुड़दंग के मामले ऐसे समय पर सामने आए हैं जब पुलिस कांवड़ियों के स्वागत में हेलिकॉप्टर से फूल बरसा रही है। मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने खुद हवाई सर्वेक्षण के दौरान कांवड़ियों पर फूल बरसाए। मेरठ के जिलाधिकारी अनिल ढींगरा भी हवाई सर्वेक्षण के दौरान कांवड़ियों पर फूल बरसा चुके हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसी व्यवस्थाएं सभी त्योहारों पर की जाती हैं चाहे वो किसी धर्म के हों। कांवड़ यात्रा में राजनीतिक रंग भी देखने को मिल रहा है। कांवड़ यात्रा में चल रहे डीजे पर जोर शोर से योगी सरकार की तारीफ में गाने बज रहे हैं।


दिक्कत ये है कि किसी भी धर्म से जुड़े मामले को आप उठाएंगे तो उसे धार्मिक विश्वास पर प्रहार के तौर पर देखे जाने का खतरा है। अगर पुलिस वाले फूल बरसाएंगे तो आस्था के आगे व्यवस्था क्यों बेबस नजर नहीं आएगी? क्या सरकार और प्रशासन के ऐसे संरक्षण की वजह से ही कुछ कांवड़िये हुड़दंगी हो जाते हैं। और ऐसे चंद लोगों की हरकत की वजह से अगर धर्म बदनाम होता है तो उसका बचाव करके किसका भला हो रहा है? क्या अब कांवड़ यात्रा भक्ति की जगह शक्ति के प्रदर्शन का प्रतीक बन गया है?