Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डा: प्रणव दा की संघ को नसीहत, क्या हैं मायने!

प्रकाशित Fri, 08, 2018 पर 07:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को भारत का मां का महान सपूत बताया है। सवाल ये है कि क्या संघ के कार्यक्रम में आना और विचार रखना सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण है कि प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति बनने से पहले 4 दशक तक कांग्रेस पार्टी की राजनीति की है। इस पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले एक बार देखते हैं कि संघ शिक्षा वर्ग के मुख्य अतिथि के तौर पर प्रणव मुखर्जी ने क्या-क्या खास बातें कही हैं।


पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने एक सधे राजनेता की तरह ये साफ कर दिया कि किसी न्यौते को मंजूर करने का मतलब ये नहीं है कि मेजबान का गुणगान ही किया जाए। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में प्रणव दा आरएसएस के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एक धर्म, एक भाषा भारत की पहचान नहीं हो सकती। विविधता में एकता भारत की ताकत है। सहिष्णुता के बगैर हम आगे नहीं बढ़ सकते। संवाद से ही समस्याएं सुलझेंगी। करीब आधे घंटे के भाषण में प्रणव दा ने भारत को लेकर एक स्टेट्समैन के तौर पर विचार रखे। अगर संघ के कार्यक्रम में जाने से कांग्रेस डरी हुई थी कि क्या प्रणव मुखर्जी संघ के विचारों को स्वीकृति देंगे तो वो गलत साबित हुआ। संघ इस बात से संतोष हासिल कर सकता है कि प्रणव मुखर्जी ने आरएसएस संस्थापक के बी हेडगेवार को भारत का महान पुत्र बताया। लेकिन अपने भाषण में उन्होंने इसकी गुंजाइश नहीं छोड़ी कि कोई उसका फायदा उठा सके।