आवाज़ अड्डा: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए पर बवाल -
Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डा: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35ए पर बवाल

प्रकाशित Tue, 07, 2018 पर 07:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 पर तो दसियों साल से राजनीति हो रही है। लेकिन पिछले कुछ समय में संविधान का अनुच्छेद 35ए ज्यादा चर्चा में है। ये अनुच्छेद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ही जम्मू कश्मीर की विधानसभा को ये अख्तियार मिलता है कि वो तय करे कि जम्मू कश्मीर राज्य का स्थायी नागरिक कौन है और उन्हें क्या विशेष अधिकार मिलने चाहिए। जैसे धारा 370 के मामले में बीजेपी को छोड़ बाकी राजनीतिक दल एकसाथ खड़े नजर आते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में 35ए हटाने के खिलाफ माहौल गरम है। सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35ए के खिलाफ दाखिल याचिका में तर्क दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा अनुच्छेद 35ए और 370 के तहत मिला है और ये देश के बाकी नागरिकों के साथ भेदभाव है। खासकर 35 ए की वैधानिकता पर इसलिए सवाल उठ रहा है क्योंकि इसे संसद के जरिए नहीं बल्कि राष्ट्रपति के आदेश से लागू किया गया था। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को बसने की छूट मिलनी चाहिए?


पूरे कश्मीर में अनुच्छेद 35ए को खत्म करने के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मामले पर सभी अलवगाववादी नेता और गैर-बीजेपी दल एक हो गए हैं। इनका मानना है कि अगर कश्मीर से 35ए को हटाया गया तो यहां हालात और खराब हो सकते हैं। इस मामले पर कांग्रेस बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि इस मामले पर बीजेपी अपना रुख साफ करे। साथ ही कांग्रेस कश्मीर के हालात के लिए बीजेपी और पीडीपी को जिम्मेदार ठहरा रही है। वहीं बीजेपी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 35ए हटाने की वकालत कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के एनजीओ वी द सिटिज़न्स ने अनुच्छेद 35 ए के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसमें तर्क दिया गया कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा अनुच्छेद 35ए और 370 के तहत मिला है और ये देश के बाकी नागरिकों के साथ भेदभाव है।


अनुच्छेद 35ए के जरिए जम्मू-कश्मीर के मूल निवासियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोग यहां जमीन नहीं खरीद सकते और ना ही उन्हें राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही राज्य में बाहरी लोगों को सरकारी नौकरी भी नहीं मिल सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई टाल दी है। 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं।


कश्मीर से अनुच्छेद 35ए को हटाने की सबसे बड़ी दलील यही है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया। बल्कि राष्ट्रपति के आदेश से इसे लागू किया गया था। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो यहां के लिए अलग कानून क्यों होना चाहिए? अनुच्छेद 35ए उस भावना पर चोट करता है जो एक देश के तौर पर हमें जोड़ता है। कश्मीर से जुड़े 35ए और 370 जैसे विवादास्पद मसले क्या कोर्ट में तय हो पाएंगे?