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आवाज़ अड्डा: आतंकवादियों पर आंसू, कश्मीर से धोखा!

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 13:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आतंकवादियों की मौत पर हमदर्दी अब कश्मीर से निकलकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तक पहुंच गई है। आतंकवादी मन्नान वानी की मौत पर यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने शोकसभा करने की कोशिश की जिसे नाकाम कर दिया गया। पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी सहानुभूति जताते हुए उसकी मौत को क्षति बता रही हैं। एचआरडी मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी है। वानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ही रिसर्च स्कॉलर था। लेकिन जब उसने देश के खिलाफ हथियार उठा लिए तो फिर उसकी मौत पर हमदर्दी क्यों जताई जा रही है, क्या ये देश के साथ धोखा नहीं हैं? और क्या जिन्ना और वानी जैसे विवादों से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की साख गिरी है?


अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों में है। यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर पहले ही काफी हंगामा खड़ा हो चुका है। ताजा मामला आतंकवादी मन्नान वानी की शोकसभा को लेकर है। जम्मू- कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर मन्नान वानी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले जम्मू-कश्मीर के कुछ छात्रों ने वानी के समर्थन में शोकसभा करने की कोशिश की। लेकिन अन्य छात्रों के विरोध के बाद ये कोशिश बेकार साबित हुई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई की है।


मन्नान वानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर था और बीच में ही पढ़ाई छोड़कर हिज्बुल में शामिल हो गया था। ऐसे में मामला और ज्यादा तूल पकड़ रहा है। अलीगढ़ से बीजेपी के सांसद पूरी यूनिवर्सिटी की जांच की मांग कर रहे हैं। मन्नान वानी की मौत पर राजनीति भी शुरू हो गई है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती कह रही हैं कि एक पीएचडी छात्र ने जिंदगी की जगह मौत को चुना। उसकी मौत हमारी ही क्षति है क्योंकि हम रोजाना युवा शिक्षित लड़कों को खो रहे हैं। बीजेपी मुफ्ती के बयान की निंदा करते हुए वानी की मौत पर सुरक्षाबलों को बधाई दे रही है।


महबूबा मुफ्ती पहले भी आतंकवादियों को लेकर विवादित बयान दे चुकी हैं और सहानुभूति भी जताती रही हैं। वो कश्मीर में पत्थरबाजों का बचाव भी कर चुकी हैं। पिछले कुछ समय में कई युवाओं के आतंकवादी संगठन ज्वाइन करने के मामले बढ़े हैं। इनमें वानी जैसा पढ़े-लिखे युवा भी शामिल हैं। लेकिन मन्नान वानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर था तो क्या हुआ। आतंक का रास्ता चुनने वाले की मौत पर मातम मना कर कोई क्या साबित करना चाहता है? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन पर विवाद हुआ था। क्या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी गलत वजह से ही सुर्खियों में रहना चाहता है। क्या उसे अपनी साख कम होने का डर नहीं है? इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की कोशिश है आवाज़ अड्डा।