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आवाज़ अड्डा: राजस्थान में किस करवट बैठेगा ऊंट

प्रकाशित Thu, 06, 2018 पर 08:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राजस्थान में चुनाव प्रचार का शोर थम गया है। अब 7 दिसंबर को राज्य की 200 विधानसभा सीटों में से 199 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 1 सीट पर मतदान प्रत्याशी के निधन की वजह से नहीं हो पाएगा। आखिरी दौर तक आते-आते राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी के बीच घमासान काफी तेज हो गया। पिछले चुनावों में देखा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के लिए माहौल बना दिया था। क्या राजस्थान में भी ये किस्सा दोहराया जाएगा। हफ्ते भर पहले राजस्थान के तूफानी दौरे पर निकले मोदी ने कुछ तीखे हमले, कुछ चुटकियां लेकर नया हौसला भर दिया। उनकी सभाओं में गूंजने वाली तालियां क्या वोट में बदलेंगी, ये सवाल है?


आखिरी दौर तक आते-आते राजस्थान का रण दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी तीर जमकर चले। राजस्थान में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील के मुद्दे को जिंदा रखा। लेकिन आखिरी दिन वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के तौर पर मोदी को हमला करने का हथियार मिल गया।


राहुल गांधी ने राजस्थान में भी मंदिरों के चक्कर लगाए। पुष्कर में अपना गोत्र बताकर ब्राह्मण कार्ड भी खेला। राहुल ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि वो हिंदुत्व की बात करते हैं लेकिन उसके बारे में नहीं जानते। राहुल ने भारत माता की जय बोलने पर भी मोदी को घेरा तो मोदी ने भी इसका जवाब दिया। शुरुआती दौर से ही मोदी पर हमलावर रहे राहुल गांधी की चुनाव प्रचार के दौरान जुबान भी फिसली। राहुल गांधी ने झुंझुनू में कुंभाराम लिफ्ट योजना को कुंभकर्ण का नाम दे दिया। मोदी जी को बस ऐसे ही मौके मिलने चाहिए।


बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में किसानों और युवाओं पर खास जोर दिया है। राहुल गांधी कह चुके हैं कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो वो 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर देंगे। लेकिन कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी उसकी मेहनत पर पानी फेर सकती है। कांग्रेस को बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ना भी भारी पड़ सकता है। वहीं बीजेपी की डगर भी आसान नहीं है। टिकट बंटवारे से नाराज बीजेपी के बागी नेता उसका खेल बिगाड़ सकते हैं। इसके अलावा पद्मावत विवाद के बाद से राजपूत भी बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं और एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों में गुस्सा दिख रहा है। सवाल ये है कि क्या बागी नेताओं से बीजेपी को नुकसान होगा। क्या आखिरी दौर में प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार करके बीजेपी के जीतने का चांस मजबूत कर दिया है? और क्या राजस्थान की जंग मोदी बनाम राहुल होकर रह गई है? इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की कोशिश है आवाज़ अड्डा।