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आवाज़ अड्डा: संविधान को खतरा, मोदी या ममता!

प्रकाशित Tue, 05, 2019 पर 07:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पश्चिम बंगाल में पॉलिटिक्स गरम होती ही जा रही है। हालत ये है कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई हैं, देश भर से विपक्षी नेता उनके समर्थन में आवाज उठा रहे हैं और कई तो वहां पहुंच भी रहे हैं। जाहिर है इस राजनीति की आंच दिल्ली तक भी पहुंची है। केंद्र को संवैधानिक व्यवस्था चरमराने का डर है। इस मामले पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार करके गृह मंत्रालय को भेज भी दी है तो क्या अब पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत आ गई है? पिछले 24 घंटे से राज्य में जो राजनीतिक ड्रामा चल रहा है वो कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सीबीआई की पार्टी जब कोलकाता पुलिस कमिश्नर के घर पहुंची तो क्या वो अपने दायरे में काम कर रही थी। या ये सब केंद्र सरकार की शह पर हो रहा था। चर्चा शुरू करने से पहले एक नजर डालते हैं कोलकाता के घटनाक्रम और उसके साथ चल रही राजनीति पर।


लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। चिट फंड घोटाले की जांच को लेकर कोलकाता में चला घटनाक्रम किसी फिल्मी एक्शन से कम नहीं है। रोज वैली और शारदा चिट फंड घोटाले में बिना वारंट कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर सीबीआई के 40 अफसरों की एक टीम पहुंची। लेकिन पुलिस ने सीबीआई के अफसरों को ही हिरासत में ले लिया। ममता बनर्जी भी कोलकाता में धरने पर बैठ गईं। उन्होंने मोदी सरकार पर सीबीआई का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा दिया।


मामले ने तूल पकड़ा और संसद में घमासान मच गया। सरकार ने राजीव कुमार के ऊपर कार्रवाई की वजह बताई। साथ ही ममता सरकार पर चिट फंड घोटाले के आरोपियों को बचाने का आरोप भी लगाया। इस मामले पर पूरा विपक्ष एक हो गया है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां ममता बनर्जी का समर्थन कर रही हैं। उन्हें बीजेपी के ऊपर हमला करने का मौका भी मिल गया है।


इस मामले को लेकर सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची। अपनी याचिका में सीबीआई ने कहा कि राजीव कुमार चिट फंड घोटाले की जाचं में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने सीबीआई से इस बात के सबूत मांग लिए हैं। इस मामले पर अब मंगलवार को सुनवाई होगी। वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने इस मामले में एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार करके गृह मंत्रालय को भेज दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही शारदा और रोज वैली चिट फंड घोटाले की सीबीआई जांच शुरू हुई थी जिसमें तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और सांसदों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सवाल ये है कि क्या ममता बनर्जी चिट फंड घोटाले के आरोपियों को बचाना चाह रही हैं? 2013 में घोटाले की जांच करने वाली एसआईटी का नेतृत्व राजीव कुमार ने किया था। सीबीआई को अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ का शक है। ममता बनर्जी अपने राजनीतिक विरोधी बीजेपी को जिस तरह राज्य से दूर रखना चाहती हैं वो भी किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने रैलियां करने के लिए अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को परेशान कर दिया। उनके हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी। अब सवाल है कि क्या चुनाव से पहले मोदी सरकार ने विरोधियों पर दबिश शुरू कर दी है? क्या ममता जिस तरह से हाल के महीनों में बर्ताव कर रही हैं वो केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ते विवाद को दर्शाता है। सवाल ये है कि हालात क्या इतने खराब हो गए हैं कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है?