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आवाज़ अड्डा: अब एंट्री मारकर किसका भला कर रहे हैं मणिशंकर!

प्रकाशित Wed, 15, 2019 पर 07:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आपहुं शीतल होय - बरसों से हम पढ़ रहे हैं, बच्चों को पढ़ा रहे हैं। लेकिन लगता है कि राजनीति में इस सबक का कोई लेवाल नहीं है। चुनाव आते हैं कि वाणी की शीतलता गायब हो जाती है। इस चक्कर में कई बार लेने के देने भी पड़ जाते हैं। खासतौर पर कांग्रेस को  चुनावों के दौरान बड़े नेताओं के उल्टे-सीधे बयानों की वजह से कई बार नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन कांग्रेस के नेता हैं कि मानते ही नहीं। यही कहानी फिर दिख रही है। सैम पित्रोदा और नवजोत सिंह सिद्धू के बयानों से बिगड़ी बात बनी नहीं थी कि मणिशंकर अय्यर ने भी एंट्री मार दी। अय्यर ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने दिसंबर 2017 में दिए एक बयान को सही ठहराया। उस वक्त अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी को नीच किस्म का आदमी बताया था। इस बार अय्यर माफी मांगने के मूड में भी नहीं दिख रहे हैं। बीजेपी को तो जैसे इसी का इंतजार था। वो अय्यर के बहाने पूरे विपक्ष को निशाना बना रही है। हालांकि कांग्रेस ने फिर अय्यर के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन सवाल ये है कि नेताओं को चुनाव में गंदे बयान देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या एक दूसरे को नीचा दिखाना चुनाव जीतने की स्ट्रैटेजी है?


आखिरी दौर से ठीक पहले मणिशंकर अय्यर की वापसी हो गई है। मणिशंकर कांग्रेस के नेता हैं लेकिन उनकी एंट्री पर बीजेपी के नेता मुस्कुरा रहे हैं। कांग्रेस के नेता थोड़े सहमे हुए हैं। मणिशंकर अय्यर ने ली भी है दमदार एंट्री। उन्होंने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना की है। लेख के आखिर में उन्होंने दिसंबर 2017 के उस विवादित बयान की भी याद दिलाई है और कहा है कि उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई है। यहां याद दिलाने की जरूरत है कि गुजरात चुनाव से पहले अय्यर ने मोदी को नीच किस्म का आदमी बताया था। नीच बताने वाले बयान को मोदी ने अपने पक्ष में जमकर इस्तेमाल भी किया। कहते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में अय्यर साहब ने भी मोदी जी की मदद कर दी थी। यही वजह है कि अब अपने पुराने बयान की याद दिलाते वक्त मणिशंकर कोई नया विवाद नहीं चाहते। लेकिन कांग्रेस ने खुद को मणिशंकर के बयान से दूर करने में कोई देरी नहीं की।


मणिशंकर अकेले नेता होते तो कांग्रेस शायद उन्हें संभाल लेती। लेकिन पार्टी में ऐसे कई उस्ताद हैं जो सेल्फ गोल दागने में माहिर हैं। सिख दंगों पर हुआ तो हुआ वाला बयान देकर सैम पित्रोदा जैसे पुराने नेता भी पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर चुके हैं। नवजोत सिद्धू काले अंग्रेज के अपने ताजा बयान के बाद चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन उनके हर बयान के बाद कांग्रेस बैकफुट पर ही दिखी है। बीजेपी का चुनाव प्रचार भाषाई मर्यादा का मानक हो ऐसा नहीं है। लेकिन कांग्रेस और विपक्ष के स्टार प्रचारकों की परेशानी ये है कि वो मोदी शाह और दूसरे दिग्गज बीजेपी नेताओं के बयानों की आलोचना तो करते हैं लेकिन उसका अपने पक्ष में कारगर इस्तेमाल कर पाए हों इसके उदाहरण नहीं दिखते। तो सवाल ये है कि जिस खेल में आपको महारथ हासिल नहीं है वहां मुंह खोल कर अपना डब्बा गोल कराने की ये जिद समझ में नहीं आती। इन पार्टियों के बड़े नेता उन्हें समझाते क्यों नहीं। या लोगों को ऐसे बिगड़े बोलों से कोई फर्क नहीं पड़ता।