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आवाज़ अड्डा: सरकार बनाने का विपक्ष का दावा, कितना है दम!

प्रकाशित Sat, 18, 2019 पर 13:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लोकसभा चुनाव का आखिरी दौर आ गया है। तमाम तरह के नारों, विचारों, सवालों और जवाबों के बाद अब आखिर में फिर सामने आ गया है सबसे बड़ा सवाल - कौन बनेगा प्रधानमंत्री? एक तरफ तो इसका जवाब साफ है। अगर बीजेपी या एनडीए जीता तो नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे। बीजेपी भी पूरे जोरशोर से लगातार दूसरी बार एनडीए की सरकार बनने का दावा कर रही है। लेकिन अगर ऐसी स्थिति आई कि उन्हें बहुमत नहीं मिला तब क्या होगा ये सवाल सबको चकरा रहा है। क्या विपक्षी पार्टियों के लिए एकजुट होकर सरकार बनाना आसान होगा? होगा तो फिर प्रधानमंत्री कौन होगा। खबर है कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस के कई बड़े नेता क्षेत्रीय दलों के नेताओं से बात कर रहे हैं। हालांकि राहुल गांधी अभी अपने पत्ते खोलने से बच रहे हैं। दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। लेकिन विपक्षी पार्टियों की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा, इस पर कोई पत्ते नहीं खोल रहा है। कंफ्यूजन बना हुआ है। सवाल ये है कि जो पार्टियां चुनाव से पहले एक नहीं हो पाईं वो क्या प्रधानमंत्री के नाम पर एक राय बना लेंगी।


गैर-बीजेपी दलों की सरकार बनने की हालत बनी तो सबसे बड़ा कंफ्यूजन प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर है। इस पर भी सहमति बनने की जमीन तैयार की जा रही है। कांग्रेस इस बारे में नरम रुख अपनाने को तैयार दिख रही है। यूपी में मायावती-अखिलेश और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कांग्रेस 100 सीटों के आसपास सिमटी तो मायावती और ममता भी पीएम पद की दावेदारी में शामिल हो सकती हैं। मायावती तो अपने आपको पीएम पद के लिए फिट भी बता चुकी हैं।


उधर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसी राव गैर-कांग्रेस और गैर-बीजेपी फ्रंट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। फोकस दक्षिण भारत की पार्टियों पर है। उनकी एक कोशिश ये भी है कि मजबूत थर्ड फ्रंट क्यों ना अपना ही नेता बतौर पीएम पेश करे। केसीआर केरल के सीएम पिनारई विजयन और डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन से मिल चुके हैं। हालांकि स्टालिन ने उन्हें कांग्रेस के साथ रहने की सलाह दी है।


वहीं बीजेपी अपनी जीत को लेकर निश्चिंत है। प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 300 से ज्यादा सीटें लाने का भरोसा जता रहे हैं। अमित शाह विपक्षी पार्टियों की कोशिश पर भी कटाक्ष कर रहे हैं।


अब सवाल ये है कि क्या 23 मई को नतीजों के बाद विपक्ष सरकार बनाने की स्थिति में होगा? अगर एनडीए को बहुमत नहीं मिलता है तो विपक्षी एकता का असली इम्तिहान होगा। क्या प्रधानमंत्री के नाम पर विपक्षी एकता बिखर तो नहीं जाएगी? क्या ये स्थिति भी बन सकती है कि केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बने जिसे कांग्रेस का समर्थन हासिल हो? और क्या हालात ऐसे भी हो सकते हैं कि विपक्षी पार्टियां कहें काश पहले ही मिल गए होते? इन्ही सवालों के जवाब खोजने की कोशिश है आवाज़ अड्डा।