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आवाज़ अड्डा: EVM पर विपक्ष का सवाल, हार से बचाव का ढाल

प्रकाशित Thu, 23, 2019 पर 07:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लोकसभा चुनाव में वोटों की गिनती शुरू होने में बस आज की रात बाकी है। लेकिन गिनती का वक्त नजदीक आते आते ईवीएम को लेकर विपक्ष का बवाल बढ़ता जा रहा है। जो विपक्ष पूरे चुनाव के दौरान बिखरा हुआ दिखता रहा वो ईवीएम और VVPAT काउंटिंग के मुद्दे पर एक हो गया है। लेकिन चुनाव आयोग भी है कि मानता नहीं। उसने वोटों की गिनती शुरू होने से पहले VVPAT पर्चियों के मिलान की विपक्ष की मांग ठुकरा दी है। चुनाव आयोग पर विपक्ष के हमले पहले भी कम नहीं थे। अब ये और तेज हो गए हैं। कांग्रेस के नेता तो चुनाव आयोग को नए नाम भी दे रहे हैं। सवाल ये है कि विपक्षी पार्टियां नतीजों से पहले ईवीएम को लेकर इतना हंगामा क्यों मचा रही हैं? और इसका क्या जनता के दिमाग पर भी कोई असर हो रहा है।


कभी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर तो कभी निजी टिप्पणियों की शिकायत करके पूरे चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े करती रहीं। लेकिन अंत में आकर विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम और VVPAT को लेकर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर दिया। 22 विपक्षी पार्टियों ने काउंटिंग की शुरुआत VVPAT पर्चियों के मिलान से करने की मांग की। चुनाव आयोग ने इसे भी ठुकरा दिया। इसके बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।


दूसरी विपक्षी पार्टियां भी चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव नतीजों से पहले ईवीएम में हेराफेरी की आशंका जता रहे हैं। ईवीएम के मुद्दे पर खून खराबे तक की धमकी दी जा रही है। बिहार की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने तो हारने की हालत में हथियार उठाने तक की बात कह दी है। बक्सर से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने तो बाकायदा हथियार उठा भी लिया है।


बीजेपी कह रही है कि विपक्षी पार्टियों का जनता पर विश्वास नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ईवीएम को लेकर विपक्ष से ही सवाल पूछ डाले हैं। सवाल ये कि जब विपक्षी पार्टियों को ईवीएम पर विश्वास नहीं है तो चुनाव जीतने पर सत्ता क्यों संभाली? क्या विपक्षी पार्टियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं? क्या काउंटिंग से दो दिन पहले चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग असंवैधानिक नहीं है? एक्जिट पोल के आधार पर ईवीएम की विश्वसनीयता पर कैसे सवाल उठाए जा सकते हैं? VVPAT आने के बाद क्या ईवीएम पर सवाल उठाना उचित है? और हथियार उठाने जैसी बातों से विपक्ष किसको चुनौती दे रहा है? क्या विपक्ष के पास इन सवालों के जवाब हैं। या ईवीएम पर ये पूरा बवाल संभावित हार से बचाव की उसकी ढाल है। इन्हीं मुद्दों पर आधारित है आवाज़ अड्डा की आज की बहस।